Tag Archives: Poem. कविता

सेठजी के प्रति भक्तिपूर्ण पत्र

परमपूज्य सेठजी! मुझे आपमें ईश्वर के दर्शन होते हैं इसीलिये परमपूज्य लिख रहा हूँ पर पता नहीं क्यों मैं आपको सेठजी ही कह रहा हूँ मुझे मालूम है आपको तो सेठजी भी कहलाना पसंद नहीं आपको तो सर, मालिक, या बॉस भी पसंद नहीं, आप चाहते हैं कि हम बुलाएँ आपको “पहले नाम” से सिर्फ […]

सुबह नौ से शाम पाँच को, सोमवार से शुक्रवार॥

बच्चों सुन लो नयी कहानी, यों हँस कर के बोली नानी, एक था हितेन्द्र दिल्लीवार, प्राइवेट कंपनी में था एच-आर॥ जीवन उसका एक चक्कर था, संसार उसका एक दफ्तर था, सुबह नौ से शाम पाँच को, सोमवार से शुक्रवार॥ निगाह डालकर एक सरसरी, सुबह वो पढ़ता था  अखबार, बस-स्टॉप की राह पकड़ता,  नहा-धोकर हो तैयार […]