टैग पुरालेख: सांप्रदायिकता

एक हिंसा और हो, एक हत्या और हो

ज्योति जो है सूर्य में, दीप में भी है वही। सूर्य हो या दीप हो, परिचय ज्योति एक है॥ एक ग्रंथ था लिखा, ज्योति का भेद मिटाने को। एक ग्रंथ था लिखा, परिचय को मिथ्या बताने को॥ एक ‘नाम’ था दिया, कि नाम, नाम में हो विलय। एक नाम था दिया, कि नाम, नाम से […]