टैग पुरालेख: संस्कृति

विविधता मर रही है, विविधता अमर रहे!

यदि किसी उद्यान के सभी फूल एक ही रंग के हों तो भला उस उद्यान की शोभा ही क्या रह जाएगी? एकरूपता में सौंदर्य कैसा? सौंदर्य तो विविधता में ही होता है। भारतीय होने के नाते विविधता को जितना निकट से हम देखते-समझते हैं, उतना अवसर अन्य किसी देश के लोगों को शायद ही मिलता […]