Tag Archives: व्यंग्य

गरम खून

पुणे में अलसुबह एक इलाहाबादी रिक्शे वाले भैया से चर्चा: मैं – ठण्ड बहुत है भैया – हाँ साहब, अभी और बढ़ेगी। मैं – इतनी तो पहले कभी नहीं पड़ी? भैया – अरे अब यही सब हो रहा है। दुनिया का टाइम आ गया है। अब टाइम आ गया है तो किसी न किसी तरीके […]

मौसम है आआपाना!

पुणे में ठण्ड का धरना, वसंत को कार्यभार देने से इंकार! – दैनिक वडाक्रांति हाल ही में आई वसंत पंचमी की तिथि के बाद ऋतुराज वसंत जब नगर की ओर अपना कार्यभार शीत से लेने आए, तो उन्हें नगर की सीमाओं के बाहर ही रोक दिया गया।  शीत ऋतु पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नगर की […]

निबन्ध – भारत एक उत्सवप्रिय देश है

प्रश्न-“भारत एक उत्सवप्रिय देश है” इस विषय पर किसी भी एक उत्सव का उदाहरण देते हुए निबन्ध लिखो। उत्तर: निबन्ध – भारत एक उत्सवप्रिय देश है। 1. हम जिस देश में रहते हैं उसे भारत कहते हैं। 2. भारत में वर्ष भर अनेक उत्सव मनाये जाते हैं। 3. दीवाली, ईद आदि इन उत्सवों में प्रमुख […]

ओह! यस, अभी! – (व्यंग्य)

गर्मियों के दिन हैं, कभी ये छुट्टी के दिन हुआ करते थे। श्रीमतीजी चूँकि कॉलेज में पढ़ाती हैं अतः उन्हें गर्मियों में छुट्टियाँ मिल जाती हैं। पिछले सप्ताह वे मायके चली गयीं। उन्हें ट्रेन में बिठा कर घर लौटा और टीवी चलाया। एक शीतल पेय का विज्ञापन आ रहा था – “पेप्सी! ओह! यस, अभी”! […]

अन्य पुरूष, मध्यम पुरूष

“अगर मैंने तुम्हें ज़रा सा तीखा बोल भी दिया तो क्या नाराज़ हुआ जाता है इतनी सी बात पर? बोला भी तो अपना समझ के बोल दिया, क्या मैं तुम्हारा कोइ नहीं?” वह बहुत देर से फोन पर अपनी पत्नी या प्रेमिका से लड़ रहा था। पत्नी या प्रेमिका होने का अनुमान मैंने इसलिये लगाया […]