टैग पुरालेख: भ्रष्टाचार

नजर मिला सवाल कर, जो हो सके बवाल कर

पाई-पाई का हिसाब ले नजर मिला सवाल कर जब राजा ही डकैत हो जो हो सके बवाल कर॥   रत्नगर्भा धरती यह जननी तेरी धरती के सारे रत्नों को चोर लिया सुजलाम-सुफलाम धरती यह जननी तेरी जल-जंगल को और फसल को चोर लिया चोर लिया फिर भी जब पेट न भरा इनका तुझसे तेरी धरती […]