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अन्य पुरूष, मध्यम पुरूष

“अगर मैंने तुम्हें ज़रा सा तीखा बोल भी दिया तो क्या नाराज़ हुआ जाता है इतनी सी बात पर? बोला भी तो अपना समझ के बोल दिया, क्या मैं तुम्हारा कोइ नहीं?” वह बहुत देर से फोन पर अपनी पत्नी या प्रेमिका से लड़ रहा था। पत्नी या प्रेमिका होने का अनुमान मैंने इसलिये लगाया […]

सुबह नौ से शाम पाँच को, सोमवार से शुक्रवार॥

बच्चों सुन लो नयी कहानी, यों हँस कर के बोली नानी, एक था हितेन्द्र दिल्लीवार, प्राइवेट कंपनी में था एच-आर॥ जीवन उसका एक चक्कर था, संसार उसका एक दफ्तर था, सुबह नौ से शाम पाँच को, सोमवार से शुक्रवार॥ निगाह डालकर एक सरसरी, सुबह वो पढ़ता था  अखबार, बस-स्टॉप की राह पकड़ता,  नहा-धोकर हो तैयार […]