टैग पुरालेख: प्रेम

दुनिया गोल है

 दुनिया गोल है एक रोज़ जब लेटा था हर रोज़ की तरह बगीचे में हवा का झोंका उड़ा लाया मेरे पास पास ही के पेड़ के एक फ़ूल को फ़ूल को मैंने देखा था, पहले भी उस बगीचे में सबसे सुंदर था जो पर नहीं मालूम था पहले कि सुगंध भी है उसमें सुगंध जिससे […]

सुबह नौ से शाम पाँच को, सोमवार से शुक्रवार॥

बच्चों सुन लो नयी कहानी, यों हँस कर के बोली नानी, एक था हितेन्द्र दिल्लीवार, प्राइवेट कंपनी में था एच-आर॥ जीवन उसका एक चक्कर था, संसार उसका एक दफ्तर था, सुबह नौ से शाम पाँच को, सोमवार से शुक्रवार॥ निगाह डालकर एक सरसरी, सुबह वो पढ़ता था  अखबार, बस-स्टॉप की राह पकड़ता,  नहा-धोकर हो तैयार […]