Tag Archives: धर्म

कोई यहां अहा नाचे नाचे!

कल फेसबुक पर मित्र आशुतोष ने कहा कि मुर्गा है जो सारे धर्मों में एकता ला देता है। हमने पूछा लेकिन कौन सा? हलाल या झटका? इसको लाइक तो बहुतों ने किया लेकिन जवाब नहीं दिया तो फिर हमने इस पर गंभीरता से विचार किया और नतीजे पर पहुँच भी गए। नतीजे पर आप भी […]

संभवामि युगे युगे?

भारत का जनजीवन हजारों वर्षों से अवतारों की कहानियों के साथ विकसित होता आया है। अलग-अलग युगों में बहुत से अवतारों ने “तारणहार” की भूमिका निभायी है। एक ऐसे समाज में जहाँ बच्चा पैदा होते ही अवतारों की कहानियाँ सुनता है, उनकी पूजा करता है और उन्हीं को आदर्श मान अपने जीवन मूल्यों को गढ़ता […]

ज्ञानार्जन – स्वामी विवेकानंद

ज्ञानार्जन -स्वामी विवेकानंद ज्ञान के आदि स्रोत के संबंध में विविध सिद्धांत प्रतिपादित किये गये हैं। उपनिषदों में हम पढ़ते हैं कि देवताओं के संबंध में प्रथम और प्रधान ब्रह्मा जी ने शिष्यों में उस ज्ञान का प्रचार किया, जो शिष्य परंपरा द्वारा अभी तक चला आ रहा है। जैनों के अनुसार उत्सर्पिणि एवं अवसर्पिणि […]

एक हिंसा और हो, एक हत्या और हो

ज्योति जो है सूर्य में, दीप में भी है वही। सूर्य हो या दीप हो, परिचय ज्योति एक है॥ एक ग्रंथ था लिखा, ज्योति का भेद मिटाने को। एक ग्रंथ था लिखा, परिचय को मिथ्या बताने को॥ एक ‘नाम’ था दिया, कि नाम, नाम में हो विलय। एक नाम था दिया, कि नाम, नाम से […]