Tag Archives: दर्शन

लोहा, लोहे को नहीं काटता!

मेरे एक मित्र हैं जिन्हें ठंड के दिनों में आईसक्रीम खाना पसंद है। वे गर्मी के दिनों में आईसक्रीम खाने से ज़्यादा चाय पीना पसंद करते हैं। उनसे इस उल्टी आदत का कारण पूछने पर कहते हैं – “लोहा ही लोहे को काटता है”। पर मैं सोचता हूँ कि क्या यह हमेशा ही सही है? […]

एक हिंसा और हो, एक हत्या और हो

ज्योति जो है सूर्य में, दीप में भी है वही। सूर्य हो या दीप हो, परिचय ज्योति एक है॥ एक ग्रंथ था लिखा, ज्योति का भेद मिटाने को। एक ग्रंथ था लिखा, परिचय को मिथ्या बताने को॥ एक ‘नाम’ था दिया, कि नाम, नाम में हो विलय। एक नाम था दिया, कि नाम, नाम से […]