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सागर हो जाओ – कविता

तुमने चाहा थाऐसा हो एक घर जिसकी खिड़की सेदिखता हो सागरतुमने सागर में डूब जाना नहीं चाहा कभी डूबकर सागर ही हो जाना नहीं चाहा कभी डूब जाओसागर हो जाओ खिड़की से जो दिखेगा आखिर कब तक टिकेगा – हितेन्द्र अनंत

माणसाने (नामदेव ढसाळ की मराठी कविता का हिंदी अनुवाद)

मराठी के प्रख्यात कवि, दलित चेतना के प्रमुख स्वर श्री नामदेव ढसाळ का आज सुबह निधन हो गया। उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी एक महान रचना “माणसाने” के अनुवाद का प्रयास ज़ारा अकरम खान, Krantikumar Arade और Dinesh Kapse के सहयोग से किया है। आप भी पढ़िये। (अनुवाद की सारी त्रुटियाँ केवल और केवल मेरी)। माणसाने – नामदेव ढसाळ ‌‌‌————– मनुष्य पहले तो […]

नजर मिला सवाल कर, जो हो सके बवाल कर

पाई-पाई का हिसाब ले नजर मिला सवाल कर जब राजा ही डकैत हो जो हो सके बवाल कर॥   रत्नगर्भा धरती यह जननी तेरी धरती के सारे रत्नों को चोर लिया सुजलाम-सुफलाम धरती यह जननी तेरी जल-जंगल को और फसल को चोर लिया चोर लिया फिर भी जब पेट न भरा इनका तुझसे तेरी धरती […]

स्मृति क्या है

स्मृति क्या है?   स्कूल की टाटपट्टी है जिसे बिछाने, झटकने और लपेटने की पारियाँ बंधी होती थीं।   पापा की बुलेट की टंकी है जिस पर बैठकर मैं एक्सीलरेटर घुमाता और सोचता कि गाड़ी चल रही है।   स्कूल के पास का कुँआ है जिसका पानी मीठा था और जिसमें मेरी चाक-कलम गिर गयी […]

दुनिया गोल है

 दुनिया गोल है एक रोज़ जब लेटा था हर रोज़ की तरह बगीचे में हवा का झोंका उड़ा लाया मेरे पास पास ही के पेड़ के एक फ़ूल को फ़ूल को मैंने देखा था, पहले भी उस बगीचे में सबसे सुंदर था जो पर नहीं मालूम था पहले कि सुगंध भी है उसमें सुगंध जिससे […]