Tag Archives: उपन्यास

पुस्तक समीक्षा – दीवार में एक खिड़की रहती थी (विनोद कुमार शुक्ल)

संपन्नता और विपन्नता के समाज में कुछ सर्वमान्य पैमाने होते हैं। संपन्न्ता या विपन्नता के अपने-अपने स्तरों पर हम किसी की अपेक्षा संपन्न और किसी की अपेक्षा विपन्न होते हैं। यह तुलना हर स्तर पर होती है कि कौन संपन्न है और कौन विपन्न। साहित्य और समाज में प्रायः संपन्न्ता की अपेक्षा विपन्न्ता केंद्र में […]

निर्धनता को शापित एक समाज की समृद्धि का अभिलेख – बूढ़ी डायरी

भारत क्या है? इस प्रश्न पर विवादों का कोई अंत नहीं है। एक वर्ग है जो भारत को यूरोप की तरह अनेक संस्कृतियों का एक बेमेल समुच्च्य मानता है। उनके मत से यदि अंग्रेजों ने इस देश पर राज न किया होता तो यह देश, एक राष्ट्र न होकर पाँच-छः सौ  बिखरी हुई रियासतें होता। […]