Category सामयिक (Current Issues)

कश्मीर पर

1. मैं कश्मीर में कथित आजादी का या उसके नाम पर एक इस्लामी राज्य स्थापित करने या उसे पाकिस्तान में शामिल करने का विरोधी हूँ। 2. दक्षिण पूर्व एशिया में भारत गणराज्य धर्मनिरपेक्षता की एकमात्र मिसाल है। इसलिए हमें अपने आजू-बाजू एक और पाकिस्तान बनने से रोकना चाहिए। 3. लेकिन हमें अपने भीतर भी एक […]

हिन्दू धर्म में बहुत कुछ है जो संघ-भाजपा छोड़ चुके

संघ और भाजपा जिस तरह का हिन्दू धर्म भारत में थोपना चाहते हैं उसके कुछ ख़ास लक्षण इस प्रकार हैं: १. इसमें वैष्णव धारा से केवल शाकाहारी मूल्यों को लिया गया है। उसमें जो सात्विकता, सत्यवादिता, परहित एवं अहिंसा जैसे मूल्य हैं, उन्हें छोड़ दिया। २. शैव-शाक्त धाराओं से केवल हिंसक भाव लिए हैं। उनमें […]

पूछना है तो यह पूछिए!

आपको फिर से राममंदिर का झुनझुना पकड़ाया गया है. फैसला आपका है, या तो इसे बजाते रहें, ताकि #साहेब कॉर्पोरेट की ड्यूटी आराम से बजाएं, या फिर आप चाहें तो इस झुनझुने को फेंक दें और सवाल पूछते रहें कि: 1. मंदिर छोड़ो और ये बताओ कि स्मार्ट सिटी का क्या हुआ? 2. पेट्रोल के […]

अभाविप को डर लगता है

पहले गन्ना होता था। फिर ये कोई भारत में ही था जिसने उसे चूसकर थूक नहीं दिया, सदियों पहले उसका रस इकट्ठा किया, ये बात आगे बढ़ी तो गुड़ बना, शक्कर बनी। कोई था जिसने सोचने की जुर्रत की। उस समय लोग उसे कहते कि नहीं परंपरा है, गन्ना चूस के फेंक दो, उसका रस […]

राग “सत्तर सालों में…”

भारत जैसे देशों की उम्र आंकना समझदारी नहीं है. यदि यह सही है कि भारत एक देश है और आने वाली सदियों तक ऐसा ही बना रहेगा, तो फिर ऐसा कोई समय बिंदु नहीं हो सकता जहां आकर सब ठीक हो जाए. क्या आज से सात सौ साल बाद भारत में कोई समस्या नहीं रहेगी? […]

शार्ली हेब्दो हत्याकांड पर

(पेरिस की कार्टून पत्रिका शार्ली हेब्दो के परिसर पर हुए आतंकवादी हमलों पर जो कुछ फेसबुक पर लिखा उसे यहाँ संग्रहित किया है –  हितेन्द्र अनंत) बधाई हो हत्यारों, कुछ निर्दोषों को मारकर तुमने अपने मजहब को ख़तरे से बचा लिया।‪#‎Charli‬ Hebdo ‪#‎Paris‬ पेशावर से पैरिस तक सिर्फ इंसान दोषी नहीं थे, मजहब भी सवालों […]

संभवामि युगे युगे?

भारत का जनजीवन हजारों वर्षों से अवतारों की कहानियों के साथ विकसित होता आया है। अलग-अलग युगों में बहुत से अवतारों ने “तारणहार” की भूमिका निभायी है। एक ऐसे समाज में जहाँ बच्चा पैदा होते ही अवतारों की कहानियाँ सुनता है, उनकी पूजा करता है और उन्हीं को आदर्श मान अपने जीवन मूल्यों को गढ़ता […]

लोहा, लोहे को नहीं काटता!

मेरे एक मित्र हैं जिन्हें ठंड के दिनों में आईसक्रीम खाना पसंद है। वे गर्मी के दिनों में आईसक्रीम खाने से ज़्यादा चाय पीना पसंद करते हैं। उनसे इस उल्टी आदत का कारण पूछने पर कहते हैं – “लोहा ही लोहे को काटता है”। पर मैं सोचता हूँ कि क्या यह हमेशा ही सही है? […]

नोट कोइ नहीं जला सकता!

नोट कोइ नहीं जला सकता!   रैक्स नोटबुक पर कोइ सूची बना रहा था। अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे जब मैं थक जाता हूँ, तब कार्यालय में थोड़ा टहल लेता हूँ। इस बहाने लोगों से राम-राम भी हो जाती है। मानव संसाधन प्रबंधन विभाग (एच.आर.) में होने के नाते यह मेरा काम है कि लोगों से […]

महामहिम पर महानाटक: देस मेरा रंगरेज ऐ बाबू

कहते हैं कि भारत एक उत्सव प्रिय देश है। उत्सव मनाने के अनेक तरीके हो सकते हैं। नाटक खेलना भी उत्सव मनाने का एक अच्छा तरीका है। लेकिन पिछले कुछ सालों से ऐसा लगता है कि हम उत्सव प्रिय देश से नाटक प्रिय देश में बदल गये हैं। नाटक यूँ तो मंच पर खेले जाते […]