श्रेणी समाज

नर्मदा – एक नदी के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर चर्चा

एक नदी,केवल एक नदी अपने भीतर न जाने कितनी कहानियाँ समेट सकती है!इस धरती पर जब महाद्वीपों में टकराव हुआ तो वह घाटी बनी जिसमें यह नदी बहती है।स्कन्द पुराण की वह कहानी कि जिसमें दूसरों को तप का फल देने वाले भोले शंकर ने खुद तप किया।या फिर वह बालक शंकर जो शायद 14 […]

आप मर तो चुके ही थे अब शायद जॉम्बी बन जाएंगे

यहाँ ही नहीं पूरी दुनिया में शिक्षा के निजीकरण का अभियान सा चल रहा है। विश्व व्यापार संगठन यानी WTO चाहता है कि सभी देश शिक्षा के “बाज़ार” में खुलापन लाएँ। दरअसल वे आपके खून की हरेक बूंद चूस लेना चाहते हैं। इतना ही नहीं वे चाहते हैं कि जब आपका खून चूसा जाए तब […]

रोज़ा-इफ़्तार बनाम नवरात्रि का फलाहार

गिरिराज सिंह, नवरात्रि, ईद, फलाहार और इफ़्तार स्वामी विवेकानंद ने अनेकों बार कहा है कि हिन्दू धर्म और इस्लाम में सबसे बड़ा फ़र्क है कि इस्लाम में सामूहिकता है, हिन्दू धर्म में नहीं। इस्लाम एक संगठित धर्म है जिसमें एक साथ मिलकर अनेक धार्मिक कार्य करने पर जोर है। हिन्दू धर्म व्यक्ति केंद्रित धर्म है […]

सबरीमाला प्रकरण पर

#सबरीमाला की समस्या ऊपरी तौर पर भले ही ऐसी लगे कि यह दक्षिणपंथियों द्वारा भड़काई आग है, पर सच यह है कि वहाँ के (केरल के!) समाज में यह मुद्दा बेहद भीतर पैठ बना चुका है। समाज का भीड़ में तब्दील होकर एक सर्वोच्च संवैधानिक शक्ति के फ़ैसले को धता बताना सामान्य घटना नहीं है। […]

रिश्तों पर से कानून के बंधन का हटना #497

भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को उच्चतम न्यायायलय द्वारा अमान्य किए जाने पर, 27 सितंबर 2018 को पहले फेसबुक में लिखा था। 1. अदालत का फैसला सौ फीसदी सही है। 2. न केवल कानूनी तौर पर बल्कि विवाहेतर (विवाह से बाहर, अपने पति/पत्नी के अलावा किसी और से) सम्बंधों में भी कोई नैतिक बुराई […]

न्यू इंडिया अर्थात पाकिस्तान

मेरठ में एक मुसलमान ने हिन्दू से घर खरीदा। मोहल्ले के लोग और भाजपा पार्षद नारेबाजी करने लगे कि हमें किसी मुसलमान के साथ नहीं रहना। अंततः हिन्दू ने मुसलमान को पैसे वापस किए और घर का सौदा रदद् हुआ। आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत का कहना है कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति […]

भारतीय परिवारों की एकजुटता बनाम बिखराव

१. ऐसा कहा जाता है कि भारत में परिवारों का एकजुट रहना, भारत की संस्कृति के कारण है। २. यह केवल आंशिक रूप से सत्य है। आंशिक रूप से सत्य इसलिए क्योंकि भारत सहित अधिकांश एशियाई समाजों में व्यक्ति से बढ़कर परिवार व समाज शक्तिशाली रहे हैं एवं मनुष्य की दैनिक गतिविधियों के केंद्र में […]

शनि शिंगणापुर प्रकरण के बहाने

१. हिन्दू धर्म में जो सुधार हुए हैं प्रायः बाहर से आए हैं. हालिया बदलाव न्यायालय के फैसले से संभव हुआ, किसी हिन्दू नेता या संत-मठाधीश को इतने सालों से एक घटिया परम्परा को सुधारने की कोई जरूरत महसूस नहीं हुई थी. बाके स्वरूपानंद का बयान सबके सामने है. (“महिलाओं को प्रवेश से बलात्कार बढ़ेंगे”) […]

किस्सा ऊँच नीच का

महाराष्ट्र में तीन पीढ़ियों से रह रहे राजस्थान के गौड़ ब्राह्मण परिवार के एक बुजुर्ग दम्पति घर आए थे। ये दो सालों से अपने पुत्र के विवाह के लिए रिश्ता ढूंढ रहे हैं। मौसम और फ़िल्मी दुनिया के बाद बात जब राजनीति पर पहुँची तो मुझे “पूरा भारत एक है, हम सब भारतीय हैं, हिंदुओं […]