लेखक पुरालेख: हितेन्द्र अनंत

नहीं है कोई टाइम मशीन

इंग्लैण्ड पर अनेक हमले हुए। अनेकों ने बाहर से आकर उस पर शासन किया। इंग्लैण्ड के केल्टिक निवासी पुरानी इंग्लिश बोलते थे जो अलग-अलग कबीलों में अलग-अलग रूपों में थी। उन पर डचों का हमला हुआ, वाइकिंग्स ने राज किया, रोमन साम्राज्य का राज सदियों रहा, फ़्रांस के नॉर्मन योद्धा विलियम द कॉन्करर ने राज […]

चौसर खेलना क्यों है हराम?

चौसर का आविष्कार नूतन शर्मा ने किया था। यह नूतन शर्मा वही है जिसने न्यूटन (चुराया हुआ नाम) के जन्म के 2000 वर्ष पहले भारत में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की खोज कर ली थी। नूतन ने यह पूरा ज्ञान लिखकर उसे प्रमाणित करने के लिए आईआईटी मुम्बई में पीएचडी के लिए आवेदन किया था। उस समय […]

लियू शियाओबो (Liu Xiaobo)

“वह मर गया, लेकिन उसके नाम पर फ़िल्मी रोना-धोना शुरू हो गया है। हम बैठकर इसका मज़ा लेंगे।” – चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स, एक ट्वीट में जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। “The person’s gone but a blockbuster tear-jerker is just on — we’ll sit back and enjoy the show.” – Global Times लियू […]

प्लेटफार्म नम्बर एक का देशद्रोह से संबंध

मुम्बई से पुणे यात्रा के लिए जून १९३० को शुरू हुई थी एक ट्रेन – डेक्कन क्वीन (दक्खन की रानी, या दक्खन ची राणी). इसे तब के मुम्बई के रईस अंग्रेज़ों के लिए शुरू किया गया था ताकि वे सप्ताहांत में पुणे आकर रेसकोर्स में घोड़ों की रेस का मजा ले सकें. यह भारत की […]

नफ़रत का मोहब्बत में बदल जाना

एक रोचक क़िस्सा सुनाता हूँ। संघ के पूर्व प्रमुख सुदर्शन जी की मृत्यु के करीब एक महीने पहले ईद के दिन उन्होंने भोपाल के कोह-ए-फ़िज़ा इलाके में मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की इच्छा व्यक्त्त की। मप्र के तब के गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने इसकी मालूमात होते ही तुरन्त वहाँ जाकर उन्हें मस्जिद जाने से […]

पशु व्यापार पर लगे प्रतिबन्ध व बीफ़ विवाद पर

1.क्या भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में आपसी समझ को “विशुद्ध” (absolute) राजनीतिक अधिकारों से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए? 2. सच तो यह है कि सदियों से यह आपसी समझ मोटे तौर पर बनी हुई थी। 3. इसे ग्रहण प्रतिस्पर्धी चुनावी राजनीति के कारण लगा है। 4. उदहारण के लिए, जितने भी “प्रमुख” रेस्त्रां या […]

भक्त का एक दिन

*भक्त सुबह: “पुरानी बातें छोड़ो, हजारों साल पहले जो हमारे पूर्वजों ने किया उसकी सजा हम क्यों भुगतें? दलित-वलित सब बेकार की बातें हैं।” *भक्त दोपहर: “हजारों साल पहले मुसलामानों ने बाहर से आकर हमला करके इस देश को गुलाम बना दिया। हमें इस देश को फ़िर से हिन्दू राष्ट्र बनाना है।” *भक्त शाम: ” […]

भारतीय परिवारों की एकजुटता बनाम बिखराव

१. ऐसा कहा जाता है कि भारत में परिवारों का एकजुट रहना, भारत की संस्कृति के कारण है। २. यह केवल आंशिक रूप से सत्य है। आंशिक रूप से सत्य इसलिए क्योंकि भारत सहित अधिकांश एशियाई समाजों में व्यक्ति से बढ़कर परिवार व समाज शक्तिशाली रहे हैं एवं मनुष्य की दैनिक गतिविधियों के केंद्र में […]

नीति वाक्य:

सभी लिबरल सेक्युलर नहीं होते, सभी सेक्युलर वामपंथी नहीं। सभी वामपंथी कम्युनिस्ट नहीं होते, सभी कम्युनिस्ट माओवादी नहीं। सभी मूर्ख “भक्त” नहीं होते, सभी भक्त भाजपाई नहीं। सभी भाजपाई संघी नहीं होते, सभी संघी दंगाई नहीं।। हितेन्द्र

कश्मीर पर

1. मैं कश्मीर में कथित आजादी का या उसके नाम पर एक इस्लामी राज्य स्थापित करने या उसे पाकिस्तान में शामिल करने का विरोधी हूँ। 2. दक्षिण पूर्व एशिया में भारत गणराज्य धर्मनिरपेक्षता की एकमात्र मिसाल है। इसलिए हमें अपने आजू-बाजू एक और पाकिस्तान बनने से रोकना चाहिए। 3. लेकिन हमें अपने भीतर भी एक […]