स्वाभाविक है महिलाओं के द्वारा हस्तमैथुन, तब भी जब वे विवाहित हों

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महिलाओं के द्वारा हस्तमैथुन स्वाभाविक है. तब भी जब वे विवाहित हों.

आईटी सेल (बताने की जरूरत नहीं किस पार्टी का) के कारिंदे फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर के पीछे पड़ गए. जैसा कि वे हमेशा करते हैं. एक ही ट्वीट हर किसी ने किया, सब के सब अपनी “ग्रैंडमा” के साथ फिल्म “वीरे दी वेडिंग” देखने गए और वहाँ स्वरा जो कि फिल्म में एक विवाहित महिला की भूमिका अदा कर रही हैं, के द्वारा हस्तमैथुन (Masturbation) का दृश्य देखकर शर्मिन्दा हो गए. गौर करने की बात यह है कि इन सभी ने Masturbation की स्पेलिंग एक ही तरह से गलत लिखी: “masturabation”.

स्वरा भास्कर फासीवादी ताकतों के खिलाफ लिखती रही हैं, इसलिए उनपर आईटी सेल का हमला समझ में आता है. तब भी जब वे केवल एक अभिनेत्री हैं, फिल्म की निर्देशक या निर्माता नहीं. लेकिन असल बात यह है कि किसी महिला के द्वारा हस्तमैथुन भला कबसे बुरी बात हो गया?

हस्तमैथुन किसी मनुष्य की यौन इच्छाओं को पूरित करने का सबसे सुरक्षित तरीका है. तब भी जब वह स्त्री या पुरुष विवाहित हो. महिलाओं के सदर्भ में इस बात को कम से कम सामने लाने के लिए यह फिल्म बधाई की पात्र है.

महिलाओं की भी यौन इच्छाएं और फंतासियाँ होती हैं. पुरुषों की तरह यदि वे इस बारे में बात करें तो इसे बुरा नहीं माना जाना चाहिए. चाहे आप किसी रिश्ते में हों या न हों, विवाहित हों या न हों, अपने करीबी मित्रों, या साथी के साथ आपको इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए. महिलाओं की यौनसंतुष्टि (Orgasm) न हो पाना भी एक बड़ा मुद्दा है जो विश्व के सभी समाजों में एक ही तरह से एक समस्या है. इन बातों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए. प्रायः यह होता है कि पुरुष फारिग हो जाएं तो महिलाओं की यौनसंतुष्टि से मतलब नहीं रखते, शायद अनेक महिलाओं ने एक बार भी यौनसंतुष्टि का अनुभव तक न किया हो, और इसीलिए उन्हें मालूम तक न हो कि यह क्या है?

महिलाओं को जब तक भोग की वस्तु माना जाएगा तब तक ऐसा होगा. काम क्रिया में जब पुरुष व स्त्री को समान माना जाएगा तब ही यह समझ विकसित होगी कि इस क्रिया में आनंद के हकदार दोनों हैं. और यह भी
कि यह आनंद अकेले भी हासिल किया जा सकता है, और उसमें कोई बुराई नहीं.

मामले की तफसील के लिए इस लिंक पर जाएं:
https://theprint.in/opinion/veere-di-wedding-its-been-a-terrible-week-for-masturbation-in-india/66155/

– हितेन्द्र अनंत

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एक टिप्पणी

  1. शिव का विज्ञान भैरव तंत्र जो की लगभग पाच हजार साल पुराण ग्रंथ हैं। उसपर भी खुली चर्चा हो तो हमारे देश मे खजुराओ की मूर्तीयो का प्रयोजन समाजच मे आईग और शिव लिंग की संकल्पना समाजच मे आयेगी फिर संस्कृती रक्षको को सही मे समझ मे आयेगा की असल खुद्द की संस्कृती क्या हैं इससेही तो हम अपरिचित नही है
    संभोग का मतलब ही है। सह+भोग।

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