नहीं है कोई टाइम मशीन

इंग्लैण्ड पर अनेक हमले हुए। अनेकों ने बाहर से आकर उस पर शासन किया। इंग्लैण्ड के केल्टिक निवासी पुरानी इंग्लिश बोलते थे जो अलग-अलग कबीलों में अलग-अलग रूपों में थी। उन पर डचों का हमला हुआ, वाइकिंग्स ने राज किया, रोमन साम्राज्य का राज सदियों रहा, फ़्रांस के नॉर्मन योद्धा विलियम द कॉन्करर ने राज किया जिसकी पुश्तें आज तक राज कर रही हैं।

इन सभी शासकों के आगमन से इंग्लैण्ड में अनेक भाषाओं का संगम हुआ। आज जो नयी अंग्रेज़ी हम पढ़ते हैं उसमें फ्रेंच, लैटिन, डच, जर्मन और ग्रीक के अनेक शब्द हैं।

ऐसा कभी नहीं देखा कि ब्रिटिश लोग इन आक्रमणकारियों को नफ़रत की नजर से देखते हों। न ही कभी ऐसा कोई आंदोलन हुआ कि भाषा से कथित विदेशी शब्द हटाए जाएं। न ही किसी ने फ्रेंच या रोमन शासकों द्वारा निर्मित इमारतों के नाम बदलने की मांग की। ब्रिटेन में कुछ शहरों के नाम पद्धति के तो कुछ के डच, तो कुछ के नाम फ्रेंच प्रभाव के हैं। कोई यह मांग नहीं करता कि इनके नाम बदल दिए जाएं।

ब्रिटिश अपने इतिहास को स्वीकार करते हैं। वो किसी टाइम मशीन में बैठकर घटनाक्रम बदलने के ख़्वाब नहीं देखते।

-हितेन्द्र अनंत

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