चौसर खेलना क्यों है हराम?

चौसर का आविष्कार नूतन शर्मा ने किया था। यह नूतन शर्मा वही है जिसने न्यूटन (चुराया हुआ नाम) के जन्म के 2000 वर्ष पहले भारत में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की खोज कर ली थी। नूतन ने यह पूरा ज्ञान लिखकर उसे प्रमाणित करने के लिए आईआईटी मुम्बई में पीएचडी के लिए आवेदन किया था। उस समय आरक्षण के चलते उस ब्राह्मण कुमार को पीएचडी में प्रवेश नहीं मिला।

इससे ग़ुस्सा होकर पहले तो नूतन शर्मा ने उस समय हिमालय की गुफ़ाओं में तपस्या कर रहे ऋषि नरेन्द्र मोदी से गुहार लगाई। तब महर्षि मोदी ने उसे बताया कि करीब 2500 साल बाद मैं भारत का शासक बनूंगा और आईआईटी में सीटें इतनी बढ़ा दूंगा कि तुमको प्रवेश मिल जाएगा।

महर्षि मोदी के आश्वासन से असंतुष्ट होकर नूतन शर्मा ने अपनी थीसिस को अरबी सागर में बहा दिया। यह थीसिस 2000 साल बाद बहते बहते थेम्स नदी के रास्ते एक अंग्रेज नौजवान को मिली जिसने इसे पढ़कर खुद का नाम न्यूटन रख लिया और इस थीसिस को प्रकाशित करने का बीड़ा उठाया। उधर नूतन शर्मा ने कुपित होकर संस्कृत के एक श्लोक के द्वारा जवाहरलाल नेहरु को श्राप दिया। उसके श्लोक का हिंदी अनुवाद कुछ इस प्रकार है:

न होते नेहरू प्रधानमंत्री, तो न बनते अंबेडकर मंत्री
न होता आरक्षण, मिलता एडमिशन, यदि नेहरू के स्थान पर आते पटेल

इस श्राप के बाद नूतन शर्मा का दिल विज्ञान से उचट गया। कुछ दिन श्लोक लिखने के बाद उसने खेल-कूद में ध्यान लगाने के उद्देश्य से क्रिकेट खेलना शुरू किया। लेकिन यह जानकर कि क्रिकेट गौमांस खाने वाले अंग्रेज़ों का खेल है, नूतन शर्मा ने खुद एक खेल का आविष्कार किया और उसे नाम दिया चौसर।

यह खेल इतना लोकप्रिय हुआ कि उस समय के विश्व हिंदू परिषद की प्रातः कालीन प्रार्थना के बाद इसे खेलना अनिवार्य कर दिया गया। एक दिन भारत में गोबर की शक्ति पर शोध करने आए रूसी वैज्ञानिकों ने इसे देखा और इसका प्रचार रूस में किया। रूस से यह खेल मंगोलिया पहुँचा और वहाँ से चंगेज़ खान ने, जो कि बौद्ध था, इसे पूरी दुनिया में खिलाने की कसम खाई।

चंगेज़ खान जब अफगानिस्तान में इस खेल का प्रचार करने पहुँचा तो वहाँ पहले से मौजूद अल क़ायदा के ख़लीफ़ा ओसामा बिन लादेन से मिला। बिन लादेन को यह खेल बहुत पसंद आया। लेकिन जब बिन लादेन को मालूम हुआ कि इस खेल का अविष्कार एक क़ाफ़िर बुतपरस्त ने किया है, तो उसने इसे खेलने के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया। साथ ही अफगानिस्तान में इसे खेलने वालों पर जिज़िया कर भी लगा दिया।

इस तरह आरक्षण की भेंट चढ़े एक ब्राह्मण कुमार के द्वारा आविष्कृत खेल को मुसलमानों के लिए हराम घोषित किया गया।

यह गुप्त कथा बिन लादेन ने कार्ल मार्क्स को सुनाई। कार्ल मार्क्स ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर को और किंग ने यह कथा भारत की यात्रा पर मोटरसाइकिल से निकले चे गुआरा को सुनाई। मोटरसाइकिल के द्वारा भारत जाकर चे ने यह कहानी चारु मजूमदार को सुनाई। चारु मजूमदार ने यह कहानी क्रांतिकारी कवि निरालाई गुप्तेस्तोव को सुनाई। निरालाई गुप्तेस्तोव से यह कहानी मुझे यानी हितेन्द्र अनंत को सुनने मिली।

इस कथा से ज्ञान प्राप्त करने वाले सभी प्राणियों का कल्याण हो।

हितेन्द्र अनंत।

 

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