बापू के नाम पत्र

(दो अक्टूबर 2015 को पहले फेसबुक पर लिखा गया)

प्यारे बापू,

हैप्पी बर्थडे! आप कहाँ हैं मैं नहीं जानता। आपकी तरह पुनर्जन्म या आत्मा के अस्तित्व पर मेरा विश्वास नहीं है बापू। लेकिन आप पर मेरा विश्वास है। आप आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में बसे हैं बापू। यह पत्र उनमें से किसी के दिल तक पहुंचा तो आप तक भी पहुंच गया यह मान लूंगा।

लिखना समाचार यह है कि आपका मुल्क अहसान फ़रामोश हो गया है बापू। आपके रास्ते पर चलने में उसे शर्म आती है। हालांकि चल सकने के लायक उसे आपने ही बनाया। दुनिया के और देश आपको पूजते हैं लेकिन हम आपको गाली देते हैं। मुझे मालूम है बापू आपको अपने सम्मान से कोई लेना देना नहीं। लेकिन आपको हमारी सलामती से तो लेना देना है ना? जब आपको नहीं मानेंगे तो आपके सन्देश को कैसे मानेंगे बापू? सन्देश नहीं मानेंगे तो सलामत कैसे रहेंगे?

आप तो कहते थे भारत गाँवों में बसता है। लेकिन अब गाँवों में ही कोई बसना नहीं चाहता बापू। सब गाँव छोड़कर शहरों की तरफ़ या तो भाग रहे हैं या भगाए जा रहे हैं। सरकार और सेठों की नजर गाँवों की जमीनों पर है। जो बचा भी है वह गाँव केवल आकार में है बापू। आकृति में वह शहर हो जाने की होड़ में है।

आपका चरखा अब कोई नहीं चलाता। खादी लोग पहनते हैं लेकिन उस सादगी के लिए नहीं जिसका वह प्रतीक थी। अब जो खादी पहनता है उसकी ताक़त और उसका रूतबा डर पैदा करते हैं बापू। खादी अब स्वावलम्बन का भी प्रतीक नहीं। आपके जमाने के सारे खादी भण्डार मरणासन्न हैं। हाँ, सरकारी खरीद में खादी जिंदा है।

आपको जाते समय हमने खूब सताया। लेकिन तब आपने हिन्दू मुसलमान का जो झगड़ा देखा था वह अब आगे बढ़ गया है बापू। सरहद के आपने दो टुकड़े देखे थे, अब तीन हो गए हैं। तीनों में नफ़रत की आँधियाँ बहती हैं। याद है आपने जब कलकत्ता में उपवास रखा तो कैसे लोगों ने हथियार फेंक दिए थे? अब ऐसा नहीं होता बापू। अब कोई नेता उपवास नहीं रखता। और आपका वह हत्यारा, नाथू। आपने तो उसे क्षमा कर दिया होगा। सरकार ने उसे फांसी दी। लेकिन अब लोग उसकी पूजा करने लगे हैं। उसकी पूजा करने वाले विलायत जाते हैं तो आपका नाम लेते हैं बापू। लेकिन उनका जैकेट और कुर्ता उतारकर देखा जाए तो शायद उसी नाथू नाम का लॉकेट मिले।

बापू, आप भगवान नहीं थे। आपमें कमियां भी थीं। लेकिन उन छोटी कमियों से क्या आपका विशाल सन्देश छोटा हो जाएगा? अफ़सोस अब कुछ लोग ऐसे ही सोचने लगे हैं। आपकी एक दो गलतियां खुर्दबीन से ढूंढ लाने का दावा करते हैं (हालांकि आपने छिपाया कुछ नहीं) फिर उन कमियों के नाम पर सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह जैसे आपके संदेशों को ही खारिज कर देते हैं। क्या करें?

आपके डॉक्टर आम्बेडकर से मतभेद थे बापू। अब लगता है कि अनेक मसलों पर आप उनकी बात मान लेते तो अच्छा होता। लेकिन आपकी नीयत पर कोई कैसे शक कर सकता है? अब लोग आपकी नीयत पर शक करते हैं और दलितों (आपका दिया नाम हमारी पीढ़ी को अच्छा नहीं लगा बापू। वहां शायद आपसे चूक हुई। इसलिए हमने हरिजन शब्द छोड़ दिया) के मन में आपके लिए नफ़रत पैदा करते हैं। दलितों पर अत्याचार भी कम नहीं हुए बापू। सब बदस्तूर जारी है।

आप शाकाहारी थे बापू। लेकिन आपके कितने ही दोस्त मांस खाते थे! आपने किसी को मना नहीं किया। आपने सुहरावर्दी के घर उपवास रखा। और भी मुसलामानों के घर प्रवास किया। लेकिन आज लोग उनके घर का पानी भी नहीं पीते बापू। उन्हें घर किराए पर नहीं देते। कुछ दिन पहले एक मुसलमान को सिर्फ़ इसलिए भीड़ ने मार दिया कि उसके घर में गौमांस होने की अफ़वाह थी। जिस जगह आपकी हत्या हुई थी, वहां से एक दो घंटे की दूरी पर ही फिर से आपकी हत्या हुई बापू।

आपको हम आए दिन मारते हैं। और फिर आज के दिन आपका जन्मदिन मनाते हैं। यह पाखण्ड अब झेला नहीं जाता बापू। या तो हम जितना हो सके आपके रास्ते पर चलें या आपका जन्मदिन मनाने का नाटक बंद करें। हम आपके लायक नहीं थे बापू। फिर भी आप आए और हमारे लिए इतना कुछ किया। हालांकि जो किया उसे हम मटियामेट कर देने पर उतारू हैं। लेकिन जो आपने किया और सिखाया उसके लिए आपका शुक्रिया कैसे अदा करें बापू? बस हैप्पी बर्थडे बोल सकते हैं, आपके रास्ते पर चल सकने की ताकत हममें नहीं बापू।

इसलिए हैप्पी बर्थडे बापू।

आपका ही

हितेन्द्र अनंत

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