फिल्म समीक्षा – बदलापुर

“बदलापुर” कहीं-कहीं अच्छी बन पड़ी है। लेकिन मोटे तौर पर हिन्दी सिनेमा की उसी व्याधि से ग्रस्त है जहां आइडिया और तकनीक तो है लेकिन अभिनय और निर्देशन में चूक हो ही जाती है। जिस फिल्म से अधिक उम्मीदें हों उसमें चूकें अधिक अखरती हैं। इस फिल्म को नवाजुद्दीनके लिए देखिए। नवाज़ हमेशा की तरह कमाल करते हैं। वे जिस दृश्य में भी हों, बस छा जाते हैं। राधिका आप्टे भी बेहतरीन हैं और उम्मीदें जगती हैं। हुमा कुरैशी सधी हुई हैं। विनय पाठक का समुचित उपयोग नहीं हुआ है। दिव्या दत्ता सहज लगीं। समस्या उनके अभिनय में न होकर पात्र में थी।

वरुण धवन अभिनय को उस स्तर पर नहीं ले जा पाए हैं जिस स्तर की मांग पात्र करता है। फिर भी उन्होंने अच्छी मेहनत की है। बदले की आग में पंद्रह साल जलने के बाद एक अधेड़ को जैसा दिखना चाहिए वैसा प्रभाव नहीं आ पाया है। कुछ दृश्य अवश्य हैं जहां उनकी आँखों में गुस्सा और खून नजर आता है, लेकिन बात बनती नहीं। हो सकता है नवाज से तुलना के कारण ऐसा हो। लेकिन फिर भी काफ़ी कुछ किया जा सकता था। समस्या निर्देशन की अधिक और अभिनय की कम है।

कहानी मध्यांतर के पूर्व ख़ास नहीं है। मध्यांतर के बाद कुछ देर रूचि जगाती है लेकिन अंत पर जाकर नियंत्रण खो बैठती है, वही सब कुछ फटाफट निबटा देने की कवायद नजर आती है। निर्देशक बदले के गुस्से को, पूरी उग्रता और गहराई से उभार नहीं पाए। जिस फिल्म का नाम ही कहानी का इशारा करता हो उसके दर्शक के लिए प्रतिशोध को अनुभव कर पाने के लिए कुछ ख़ास नहीं है। उसके बाद, यह दिखाया गया है कि बदला लेने के लिए नायक पंद्रह वर्ष इन्तजार करता है। पंद्रह साल बाद लिया जाने वाला बदला उस शिद्द्त से नहीं फिल्माया गया जिसकी उम्मीद थी। इस फिल्म इच्छाधारी नाग-नागिन की फिल्मों वाले बदले भी अच्छे लगते हैं। निर्देशक को गलतफहमी थी कि वे हिंसा और बदले की भावना को कुछ ज्यादा ही उभारकर बता रहे हैं, इसलिए फिल्म में नैतिक शिक्षा देने का प्रयास किया गया है जो कहानी को कमज़ोर ही बना देता है। अश्विनी खालसेकर को जासूस की भूमिका दी गयी है, फिल्म देखकर आप हैरान होते हैं कि जासूस के पात्र ने ऐसा क्या किया है जिसे जासूसी कहा जाए?

badlapur

छायांकन बेहतरीन है। जो बात अभिनय व कहानी से नहीं कही गयी वह कैमरा कह पाता है। पुणे-मुंबई क्षेत्र के मौसम और नजारों को सूक्ष्मता से कैद किया गया है। शायद अरसे बाद एक हिन्दी फ़िल्म आयी है जो मुंबई की बजाय पुणे पर केंद्रित है। उस सन्दर्भ में गहराई से काम किया गया है।

बदलापुर एक औसत रोमांचक फिल्म है। एक बार अवश्य देखी जाय।

अंक: ३/५

निर्देशक – श्रीराम राघवन
कथा – अर्जित बिस्वास, श्रीराम राघवन
कलाकार – वरुण धवन, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, हुमा कुरैशी, विनय पाठक, राधिका आप्टे, यामी गौतम, दिव्या दत्ता

-हितेन्द्र अनंत

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