गरम खून

पुणे में अलसुबह एक इलाहाबादी रिक्शे वाले भैया से चर्चा:

मैं – ठण्ड बहुत है
भैया – हाँ साहब, अभी और बढ़ेगी।
मैं – इतनी तो पहले कभी नहीं पड़ी?
भैया – अरे अब यही सब हो रहा है। दुनिया का टाइम आ गया है। अब टाइम आ गया है तो किसी न किसी तरीके से सबको जाना है ना? अब देखिये कइसे पेशावर में बच्चों को स्कूल में मार दिया है!
मैं – बहुत बुरा हुआ।
भैया – अइसा है, कि बच्चों के साथ जो हुआ उसका तो हम लोगों को दुःख है। लेकिन पाकिस्तान को बढिया सबक मिला। उसी ने न सब पैदा किया है। अब वही पाकिस्तान को मरेगा।
भैया – अब सर ऐसा है कि लोग जो मांस खाते हैं ना, वो ही ऐसा काम कर सकते हैं। जिसने मांस खा लिया, जो जानवर को कटते हुए देख सकता है और उसको खा सकता है, उसके लिए फिर बच्चों को मारना कोई बड़ी बात नहीं।
मैं – आप शाकाहारी हैं?
भैया – कभी हाथ तक नहीँ लगाए सर। देख भी लेते हैं तो उल्टी कर डालते हैं। न कभी कुछ पिए न खाए। जो आदमी शाकाहारी होता है वो कभी हिंसा नहीं कर सकता सर। उसका दिमाग शांत रहता है। (धीरे से कहा – ये सब मोमेडन लोग इसीलिए न दंगा फसाद करता है सर। रात दिन बस मारकाट में लगा रहता है।) मैं – पता नहीं इंसान कब तक एक दूसरे को मारेगा?
भैया – अभी तो ये और बढ़ेगा सर। अब जो है दस बीस साल में विश्वयुद्ध होने वाला है। वो तो अमेरिका भारत को रोक के रखा है नहीं तो भारत जिस दिन चाहे पाकिस्तान ख़तम! अरे एशिया का सबसे बड़ा देश है भारत!
मैं – और चीन?
भैया – अरे सर चीन भी भारत से डरता है। क्योंकि चीन लड़ेगा भारत से तो उसको रूस और अमेरिका दोनों न ठोंक देगा? अभी अमेरिका भारत को रोक के रखा है कि तुम चुप रहो! अभी हम अफगानिस्तान को ठीक कर लें, फिर पाकिस्तान से तुम निबट लेना।
मैं – लेकिन मोदीजी तो कह रहे हैं भारत पाकिस्तान में दोस्ती होना चाहिए?
भैया – सब कहने की बात है सर। मोदीजी जिस दिन चाहे पाकिस्तान पर चढ़ाई कर दे, लेकिन अमेरिका न रोक के रखा है उनको भी।
मैं – लेकिन भारत और पाकिस्तान दोनों के पास परमाणु बम है?
भैया – ऊ सब से क्या होगा सर? भारत के पास इतनी जनसंख्या है! भारत के नौजवान में वो जज़्बा है कि आज मोदीजी आवाज लगा दे तो कल सब सेना में भर्ती हो जाएगा। इतना बड़ा सेना बनेगा कि पाकिस्तान कुछ नहीं कर पाएगा। हमारे भैया तो कबसे बोल रहे हैं कि सरकार आदेश तो दे! हम लोग दो दिन में पाकिस्तान ख़तम कर देंगे।
मैं – आपके भैया सेना में हैं?
भैया – हाँ सर। दोनों भाई हमारे सेना में हैं।
मैं – आप नहीं गए?
भैया – अब हमारे पैर में चोट लगी थी, नहीं तो अरमान हमारा भी था सर।
मैं – कैसे लगी चोट?
भैया – अब इलाहाबाद का तो आप जानते होंगे सर। चला दिए कट्टा! हो गया था लड़कपन में झगड़ा, दोनों तरफ से कट्टाबाजी हो गया।
मैं – मतलब बचपन मे आप काफी झगड़ों में शामिल रहे?
भैया – अब गरम खून रहा सर। कोई बात सहन नहीं होती थी तो भिड़ जाते थे।

-हितेन्द्र अनंत

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