फिल्म समीक्षा – हर (Her)

मुख्य भूमिका: जोकिन फीनिक्स, स्कार्लेट जोहांसन, एमी एडम्स (Joaquin Phoenix, Scarlett Johansson, Amy Adams) Her-poster1

निर्देशन एवं लेखन: स्पाइक जोंजे (Spike Jonze)

भारत में हाल ही में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘हर’ भावुकता और विज्ञान गल्प का अद्भुत मिश्रण है। भविष्य पर आधारित यह फिल्म आज से करीब तीस से पचास वर्ष आगे की दुनिया की कहानी कहती है। थियोडोर (फीनिक्स) ‘ब्यूटीफुल हैंड रिटन लेटर्स डॉट कॉम’ नाम की एक कंपनी में काम करता है जहाँ उसका काम कंपनी के ग्राहकों के लिये उनकी आवश्यकता अनुसार पत्र लिखना है। थियोडोर का हाल ही में अपनी पत्नी से तलाक हुआ है जिसके कारण वह अकेलेपन के साथ आने  वाली विभिन्न समस्याओं का  सामना कर रहा है। आज के जमाने के आईफोन की  सीरी या सैमसंग की  गैलेक्सी जैसी  सॉफ़्टवेयर सुविधाएँ हमारी आवाज सुनकर अनेक मौखिक निर्देशों का पालन कर सकती हैं और कुछ हद तक हमसे बात भी कर सकती हैं, लेकिन इस फिल्म की कहानी के समय यह तकनीकी अत्याधिक उन्नत हो चुकी होती है।

थियोडोर अपने कंप्यूटर और फोन पर एक साथ काम करने वाला एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम “ओएस वन” खरीदता है जो कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम मेधा) पर आधारित है। (कृत्रिम मेधा पर काम करने वाले यंत्र मानव मस्तिष्क की भांति वातवरण से  सीखते हुए स्वतः विकसित होते जाते हैं और उनका विचार तंत्र लगभग मानव मस्तिष्क की भांति ही कार्य करता है)। थियोडोर से बातें करते-करते कंप्यूटर की ऑपरेटिंग सिस्टम समांता (स्वर – स्कार्लेट जोहांसन) मानव मस्तिष्क की भावनाओं की समझ विकसित करने लगती है। और फिर कहानी उस मोड़ पर आती है जहाँ थियोडोर को समांता (एक कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम) से प्रेम हो जाता है।

कहानी के लेखक एवं निर्देश्क स्पाइक इस प्रेम कथा को अनेक भावुक मोड़ों से होते हुए आगे ले जाते हैं। प्रत्येक दृश्य के निर्देश्न में कसावट है। दर्शक न केवल पात्रों की प्रेमकथा के साथ भावनाओं में बहता है बल्कि साथ ही वह एक मशीन और मानव के बीच प्रेम पर गहन विचार करने को विवश भी हो जाता है। चूंकि प्रेम का कोइ भौतिक अस्तित्व नहीं है, वह विचार की वस्तु है, तो जब किसी मशीन में पूर्णतः विचार करने की क्षमता विकसित हो जाए तो क्या विचार के स्तर पर उसे प्रेम नहीं हो सकता?

फिल्म में भावुक दृश्यों को इतनी मजबूती से फिल्माया गया है कि मशीन और मानव के बीच प्रेम की संभावना से भी आगे के प्रश्न उठते हैं। जैसे कि हम मानवों के बीच जो संबंध हैं, भावनाएँ हैं वे भी तो केवल विचार हैं, भौतिक अस्तित्व के समाप्त हो जाने पर उन विचारों का क्या अस्तित्व होता है? क्या हम सभी विचारों के इस महासागर की अभिन्न बूंदे हैं?

स्कार्लेट ने समांता के लिये जो पार्श्व स्वर दिया है वह काबिले तारीफ है। वास्तविक अभिनय का मौका न मिलते हुए भी उन्होंने कल्पनातीत काम किया है। जोकिन फीनिक्स का अभिनय शानदार है।  फिल्म में उनकी छवि और वेशभूषा मोहक हैं। अकेलेपन के दर्द को उन्होंने इतनी बारीकी से पर्दे पर उतारा है कि दर्शक स्वयं कुछ क्षणों के लिये अकेलापन अनुभव करने लगे।

यदि आप विज्ञान और तकनीकी में रूचि रखते हैं, यदि आप एक उम्दा प्रेमकथा देखना चाहते हैं, यदि आप अस्तित्व के प्रश्न पर विचार करना पसंद करते हैं, यदि आप इनमें से कोइ भी एक हैं तो आपको यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिये।

-हितेन्द्र अनंत

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