मौसम है आआपाना!

पुणे में ठण्ड का धरना, वसंत को कार्यभार देने से इंकार!

– दैनिक वडाक्रांति

हाल ही में आई वसंत पंचमी की तिथि के बाद ऋतुराज वसंत जब नगर की ओर अपना कार्यभार शीत से लेने आए, तो उन्हें नगर की सीमाओं के बाहर ही रोक दिया गया।  शीत ऋतु पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नगर की सीमाओं पर रास्ता रोको अभियान चलाया हुआ है, नगर के भीतर चौक चौराहों पर उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी है। आमतौर पर पुणे का आम आदमी इन दिनों वसंत ऋतु का लाभ लेने का आदी है, इसलिये वह इस परिवर्तन से हतप्रभ है। हमारे विशेष संवाददाता पोहेराव मिसळकर ने ऋतुराज वसंत और शीत ऋतु के प्रतिनिधि ठण्डीवाल से बातचीत की, जिसका विवरण यहाँ प्रस्तुत है:

मिसळकर: वसंत जी, आप अभी तक नगर की सीमाओं के बाहर क्यों खड़े हैं? अब तक तो परंपरा के अनुसार आपको नगर के भीतर होना चाहिये था।

वसंत: देखिये इन ठण्डीलाल जी के नेतृत्व में ऋतुओं के संविधान की धज्जियां उड़ा दी गयी हैं।  ऋतुओं के आने-जाने की एक व्यवस्था है, नियम-कानून हैं, लेकिन लगता है कि ठण्डीलाल जी को अराजकता ही पसंद है। मैं उन पर अराजक होने का आरोप लगाता हूँ।

मिसळकर: ठण्डीलाल जी, आप ऋतुराज वसंत को गद्दी सौंपकर चले क्यों नहीं जाते? आखिर यही तो परंपरा है!

ठण्डीलाल: काहे की परंपरा जी? काहे का ऋतुराज? किसने बनाया है उन्हें ऋतुओं का राजा? जी आप मीडिया के साथ यही समस्या है। आप लोग जब तक इन झूठे राजाओं को बेनकाब नहीं करेंगे ये हम आम आदमियों पर राज करते रहेंगे।

मिसळकर: वसंत ने आप पर अराजक होने  का आरोप लगाया है।

ठण्डीलाल: हाँ मैं अराजक हूँ! यदि अपने हक के लिये लड़ना अराजकता है तो मैं अराजक हूँ।

मिसळकर: लेकिन आपको नहीं लगता कि ऋतुओं का एक संविधान होता है, एक  व्यवस्था होती है, अब सत्ता वसंत को सौंपने का समय आ गया है।

ठण्डीलाल: जी देखिये हम यहाँ व्यवस्था बदलने आये हैं। आप यथास्थितिवादी हैं।  परिवर्तन से हमेशा लोग घबराते हैं। हमें संविधान की चिंता नहीं है, हमें तो यह व्यवस्था बदलनी है जी। फिर कैसा संविधान? किसने बनाया संविधान? क्या मौसमों का समय तय करने वाले ने जनता से एसएमएस के द्वारा राय ली थी? क्या कोइ सर्वेक्षण किया था? किया था तो उसके आंकड़े उनकी वेबसाइट पर है? हमको देखिये! हमने अपने सारे आंकड़े  अपनी वेबसाइट पर रख दिये हैं जी।

मिसळकर: आप यह तो देखिये कि ऋतुओं का संतुलन बिगड़ रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है।

ठण्डीलाल: जी ये संतुलन किसने बिगाड़ा है? हमने? ये संतुलन तो जी पूंजीपतियों ने बिगाड़ा है जी। पुणे के चारों तरफ आप देख लो जी, फैक्ट्रियाँ लगा दी हैं, पहाड़ों को काटकर रियल एस्टेट वालों ने काँक्रीट के जंगल खड़े कर दिये हैं। ये सब पर्यावरण को बर्बाद कर रहे हैं।

मिसळकर: यानी आप पूंजीवाद के खिलाफ़ हैं?

ठण्डीलाल: ओ ना जी ना! पूंजीवाद तो अच्छी व्यवस्था है! हम तो ना जी,  वो क्रॉनी पूंजीवाद होता है ना, वो भाई-भतीजे वाला पूंजीवाद, हम तो उसके खिलाफ़ हैं जी।

इसके  आगे हमारे संवाददाता ने साक्षात्कार नहीं लिया। साक्षात्कार के इतने हिस्से के साथ ही संवाददता ने अपना इस्तीफ़ा हमें भेज दिया है। उनका कहना है कि वे ठण्डीलाल के कार्यकर्ता बनने जा रहे हैं।  इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पुणेवासियों को ठण्ड से निजात नहीं मिली है।
-संपादक

– हितेन्द्र अनंत

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