सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वाले [कविता]

सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वालों को देखकर

मेरे मन में अनेक प्रश्न उठते हैं।

coffee

 

बाज़ार में सौ रूपये की कॉफी मिलती है

यदि यह मैं मम्मी से कह दूँ

तो मम्मी हँसेगी

कहेगी ये भी कैसे हो सकता है भला?

हिसाब लगा लेगी मम्मी तुरंत

इतने का दूध, इतने की कॉफ़ी

और इतने की गैस का जला चूल्हा

तो फिर कहाँ से हुई सौ रूपये की कॉफ़ी?

कहाँ मिलती है रे, ये सौ रूपये की कॉफ़ी?

मम्मी कहेगी घर पर ही क्यों नहीं पी लेते वे कॉफ़ी?

 

मम्मी अक्सर “घर पर ही” पर जोर देती है

इसलिये घर पर ही बना लेती है

समोसे, इडली और दोसा

यहाँ तक कि केक और पिज्जा भी।

 

पर सौ रूपये की कॉफ़ी मिलती भी है

और लोग पीते भी हैं

और जैसा कि मैंने आपसे प्रारंभ में ही कहा

कि सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वालों को देखकर

मेरे मन में अनेक प्रश्न उठते हैं।

 

प्रश्न  कि सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वाले

जब आपस में बातें करते हैं कॉफ़ी हाउस में

तब वे देखते क्यों नहीं एक-दूसरे को

वे क्यों अपने मोबाईल की ही तरफ अधिक देखते रहते हैं

मैंने देखा है कि उनका मोबाईल या जो भी वह उपकरण है

उनकी हथेली से थोड़ा बड़ा होता है प्राय़ः।

 

प्रश्न कि सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वाले

घंटों बैठे रहते हैं कॉफी हाउस में

बिना कुछ मंगाये

या तब भी जब उनकी कॉफी

काफ़ी देर पहले खत्म हो चुकी होती है

फिर उन्हें कोइ उठने को क्यों नहीं कहता?

 

प्रश्न कि सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वाले

अकेले ही कैसे चले आते हैं

सौ रूपये की कॉफ़ी पीने के लिये?

मुझे तो अकेले पानी-पूरी खाने में भी शर्म आती है।

 

प्रश्न कि सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वाले

कॉफ़ी हाउस में अकेले

लैपटॉप पर क्या काम करते हैं?

क्या वे दफ्तर नहीं जाते?

 

यह मैंने आपको प्रारंभ में नहीं कहा

कि सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वालों को देखकर

मुझे डर भी बहुत लगता है।

क्योंकि मुझे हमेशा ही कहा गया कि

जीवन में आगे बढ़ो!

इतना आगे

कि तुम सौ रूपये की कॉफ़ी पी सको

इतना आगे कि सौ रूपये की कॉफ़ी जहाँ मिलती है

उस कॉफ़ी हाउस में मिलने वाली हर प्रकार की कॉफ़ी का तुम्हें ज्ञान हो

इतना आगे कि वहाँ के अंग्रेजी नाश्ते का मेन्यू याद हो तुम्हें

और वहाँ के केवल अंग्रेजी में ही बात करने वाले वेटर से

तुम उससे भी अच्छी अंग्रेजी में बात कर सको!

 

मेरा आगे बढ़ना

आगे, यानी जितना भी मैं आगे बढ़ पाया

मम्मी को अच्छा नहीं लगता

इसलिये नहीं कि मैं सौ रूपये की कॉफ़ी पीने लगा हूँ

इसलिये कि

अब मैं “घर पर ही” नहीं रहता।

 

अब मैं आपको यह भी कह दूँ

कि सौ रूपये की कॉफ़ी जो पी सकते हैं

उनमें और मुझमें अनेक अंतर हैं

उनके चेहरे मुझसे अलग हैं

उनके कपड़े भी

उनके मोबाईल भी

मेरे मोबाईल से अलग हैं

उनमें से कुछ बहुत ज़ोरों से हँसते हुए बाते करते हैं

उनमें से कुछ एकदम चुप रहते हैं

पर उनमें और मुझमें सबसे बड़ा अंतर तो यह है

कि सौ रूपये की कॉफ़ी जहाँ मिलती है

उस कॉफ़ी हाउस में

जब वे जाते हैं

तो कॉफ़ी पीते हुए

या बातें करते हुए

वे देखते हैं केवल

अपने  मोबाईल को, या जो भी वह उपकरण है

और मैं

केवल उन्हें ही देखता रह जाता हूँ।

 

-हितेन्द्र अनंत

6 टिप्पणिया

  1. Sir.. behtareen hai parantu main 100 rs ki coffee bhi peeta hoon… ghar par bhi banata hoon aur agar 100 $ ki milegi toh taste karna chahunga… coffee ko nahin experience ko….:) aap vicharniya anubhav likh detein hain

    1. अवश्य पियो सौ डॉलर की कॉफ़ी। फिर मुझे बताना कि अनुभव का स्वाद कैसा रहा🙂

  2. It is interesting to explore this perspective of coffee worth Rs. 100. Seems there are few important messages hidden in this poem….read between the lines..is what writter is saying🙂 Good one…..

  3. एक बार और पढ़ी ये कविता! मजेदार !

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: