दैनिक पुरालेख: अक्टूबर 7, 2006

बुंदेलखंडी लोककथा: बुद्धि बड़ी या पैसा(शिव सहाय चतुर्वेदी)

किसी देश में एक राजा राज करता था। उसके लिए पैसा ही सबकुछ था। वह सोचता था कि पैसे के बल पर दुनिया के सब काम-काज चलते हैं। ‘तांबे की मेख तमाशा देख6, कहावत झूठ नहीं है। मेरे पास अटूट धन है, इसीलिए मैं इतने बड़े देश पर राज करता हूं। लोग मेरे सामने हाथ […]

बुंदेलखंडी लोककथा: पंछी बोला चार पहर (रमाकांत दीक्षित)

पुराने समय की बात है। एक राजा था। वह बड़ा समझदार था और हर नई बात को जानने को इच्छुक रहता था। उसके महल के आंगनमें एक बकौली का पेड़ था। रात को रोज नियम से एक पक्षी उस पेड़ पर आकर बैठता और रात के चारों पहरों के लिए अलग-अलग चार तरह की बातें […]