Monthly Archives: सितम्बर 2006

नाग-पूजा- मुंशी प्रेमचंद

प्रात:काल था। आषढ़ का पहला दौंगड़ा निकल गया था। कीट-पतंग चारों तरफ रेंगते दिखायी देते थे। तिलोत्तमा ने वाटिका की ओर देखा तो वृक्ष और पौधे ऐसे निखर गये थे जैसे साबुन से मैने कपड़े निखर जाते हैं। उन पर एक विचित्र आध्यात्मिक शोभा छायी हुई थी मानों योगीवर आनंद में मग्न पड़े हों। चिड़ियों […]

शंखनाद- मुंशी प्रेमचंद

भानु चौधरी अपने गॉँव के मुखिया थे। गॉँव में उनका बड़ा मान था। दारोगा जी उन्हें टाटा बिना जमीन पर न बैठने देते। मुखिया साहब को ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मर्जी बिना गॉँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। कोई घटना, चाहे, वह सास-बहु का विवाद हो, चाहे मेड़ या […]

पंच परमेश्वर- मुंशी प्रेमचंद

जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते थे। उनमें […]

बड़े घर की बेटी- मुंशी प्रेमचंद

बड़े घर की बेटी बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गॉँव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गॉँव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति-स्तंभ थे। कहते हैं इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में […]

दुर्गा का मंदिर- मुंशी प्रेमचंद

दुर्गा का मन्दिर बाबू ब्रजनाथ कानून पढ़ने में मग्न थे, और उनके दोनों बच्चे लड़ाई करने में। श्यामा चिल्लाती, कि मुन्नू मेरी गुड़िया नहीं देता। मुन्नु रोता था कि श्यामा ने मेरी मिठाई खा ली।       ब्रजनाथ ने क्रुद्घ हो कर भामा से कहा—तुम इन दुष्टों को यहॉँ से हटाती हो कि नहीं? नहीं तो […]

आत्माराम-मुंशी प्रेमचंद

आत्माराम  वेदों-ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान में प्रात: से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गये थे कि जब किसी कारण से वह बंद हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई चीज गायब हो गयी। […]

हिन्दी की प्रसिद्ध कविताएँ: मधुशाला

इंटरनेट यानी अंतरज़ाल पर हिन्दी साहित्य के जो भी मोती उपल्ब्ध हैं, उन्हें एक स्थान पर लाने का प्र्यत्न कर रहा हूँ। महाकवि हरिवंश राय बच्चन जी की ये रचना आज भी युवा हृदयों की साम्राज्ञी है। मधुशाला मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, […]

प्रसिद्ध् हिन्दी कवितायें

यह कुछ सुंदर हिन्दी कविताओं का संग्रह है। इनमें मेरे प्रिय कवि गोपालदास नीरज की दो कवितायें भी सम्मिलित हैं। ऐसी और भी कवितायें “तिरछी नजरिया” पर शीघ्र ही आयेंगी। कारवाँ गुज़र गया स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से, और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे। […]

वो एक सुबह थी नयी सुबह

वो एक सुबह थी नयी सुबह जब आलस भीतर का टूटा एक दाग़ था वो छूटा जब बरसों की आदत छोड़्कर निकल पड़ा मैं तड़के सुबह पाँच बजे सैर पर दौड़ लगायी मील भर और चटकायीं कुछ हड्डियाँ यानी कुछ व्यायाम किया आज के दिन ये वचन दिया स्वयं को कि आलस्य से कोसों दूर ताज़गी […]

Lage Raho Vidhu Vinod Chopra Bhai

Raghupati Raghav Raja RamPatit Pavan Sita RamIshwar Allah Tero NaamSabko Sanmati De Bhagwan Yes! Now I can see Gandhiji around while typing these lines minutes after watching the movie “Lage Raho Munna Bhai” (LRMB). But before you proceed my advice is watch the movie first. Second, for your information, this post is not a review […]