शिरीष खरे की पुस्तक “एक देश बारह दुनिया” पढ़ी। यह पुस्तक रिपोर्ताज संकलन भी है साथ ही यात्रा ससंमरण भी। शिरीष ने नर्मदा की यात्रा (परिक्रमा नहीं) की है। एक पत्रकार होने के नाते उन्होंने अनेक राज्यों के अनेक क्षेत्रों यात्राएँ की हैं, वहाँ से रिपोर्टें भेजी हैं। लेकिन इस दौरान एक पत्रकार बहुत कुछ […]

धर्मों के दो स्वरूप होते हैं। पहले एक आंतरिक स्वरूप होता है, जिसमें धर्म की अवधारणाएँ होती हैं, उसकी शिक्षा होती है और उसका दर्शन होता है। लेकिन इस आंतरिक स्वरूप को जनसुलभ बनाने के लिए धीरे-धीरे उसका बाह्य स्वरूप आकार लेता है। इसमें अनेक बाते होती हैं, हलाल-हराम, शुभ-अशुभ, पवित्र-अपवित्र आदि। बाह्य स्वरूप में […]

गुडगाँव में वह हो रहा है जो हम पाकिस्तान में होता देख चुके हैं। गुडगाँव के कुछ हिन्दू रहवासियों को मुसलमानों का किसी खुले मैदान में नमाज़ पढ़ना पसन्द नहीं आ रहा। इस दौर में एक बड़े अपवाद के तौर पर गुडगाँव का प्रशासन मुस्लिमों को सुरक्षा दे रहा है और नमाज़ पढ़ने में उनकी […]

सिंघु में बर्बरता से हत्या की गई है। ऐसा बताया जा रहा है कि निहंगों ने यह हत्या की है। इससे पहले भी कोरोना लॉक डाउन में रोके जाने पर निहंगों के एक समूह ने पंजाब पुलिस के एक अधिकारी के हाथ काट दिए थे। किसी भी फ़िरक़े को यह हक नहीं दिया जा सकता […]

यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नहीं, भैया-दीदी कांग्रेस है। महज़ भाजपा से दुश्मनी की वजह से इस कांग्रेस को लोकतांत्रिक दल मानने की भूल न की जाए। जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार का मुखिया, यदि एक व्यक्ति की “कड़े फ़ैसले” लेने की सनक के कारण बदला जाए, अर्थात पूरी सरकार गिरा दी जाए तो यह […]

रज़ा मीर साहब का उपन्यास “मर्डर एट मुशायरा” पढ़ा। यह एक हिस्टॉरिकल फिक्शन है (हिन्दी में क्या कहेंगे?)। साथ ही फिक्शन के भीतर मर्डर मिस्ट्री भी है। सबसे मज़ेदार बात है कि इस उपन्यास के केन्द्र में चचा ग़ालिब मर्डर की गुत्थी सुलझाने के लिए जासूस नियुक्त किए जाते हैं। ग़ालिब, फ्रेज़र, मेटक्लेफ, ज़फ़र ये […]

समाजविज्ञान के लिए भारत में एक बड़ी घटना है जिसका अध्ययन होना चाहिए। यदि हुआ है या हो रहा है, तो मैं उसके बारे में जानना चाहूंगा। यूँ पिछले तीस सालों में ऐसा बहुत कुछ है जो बड़े पैमाने पर बदला है, और जिसका अध्ययन या तो हुआ नहीं या मुझ जैसे पाठकों तक पहुँचा […]

प्राथमिक स्कूल – शिक्षक पढ़ाने में मेहनत करते थे। बच्चे पढ़ जाएँ यह उनकी दिलचस्पी थी। लेकिन वही रटाने वाली शिक्षा, मारना पीटना। गाँव का सरकारी स्कूल। कुछ शिक्षक स्कूल से ज़्यादा खेत में वक्त बिताते थे। एक दारू पीकर आते थे। मिडिल स्कूल – बेहद अच्छा। शिक्षक दिलचस्पी लेकर पढ़ाते थे। कहानियों के ज़रिए […]

We studied together in the Kalibadi school in Raipur. In the Kalibadi locality in Raipur, there are many schools and once, there used to be a heavy traffic of schoolchildren riding their bicycles. One day, Fakharuddin informed me that there’s a Paan shop (the Indian mouth freshener wrapped in a betel leaf) whose owner is […]

आज फखरुद्दीन की याद आ गई। हम दोनों कालीबाड़ी स्कूल में पढ़ते थे। रायपुर शहर में कालीबाड़ी (काली माँ का मंदिर) के आसपास के इलाके को इसी नाम से जाना जाता है। एक दिन फखरुद्दीन ने मुझे बताया कि कालीबाड़ी में एक पान की दुकान है। वह पानवाला शंकर जी का भक्त है उसने अपनी […]