आपको किस क़िस्म का संगीत पसंद है? यह सवाल अक्सर मुझसे पूछा जाता है, और मैं भी दूसरों से यह सवाल पूछा करता हूँ। हालाँकि भारत में यह सवाल ऐसे भी पूछा जाता है कि आपको कैसे गाने पसंद हैं? इस लेख में मैं इसी सवाल का जवाब अपनी ओर से ढूंढना चाहता हूँ। क्या […]

“पेस्तनजी” भारत के पारसी समुदाय पर केंद्रित गिनी-चुनी फिल्मों में से एक है। एक समुदाय जिसका भारत के स्वतंत्रता संग्राम, उद्योग जगत, विज्ञान और कानून की दुनिया और साथ ही कलाजगत में योगदान उसकी जनसंख्या में हिस्से के ठीक उलट है, उसकी संस्कृति पर शायद और भी बहुत सी फ़िल्में बननी चाहिए थीं। मुख्यधारा के […]

बचपन से सुनता आ रहा हूँ कि पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। यहाँ तक कि स्वामी विवेकानंद ने भी यही कहा था। यानी करीब 130 सालों से तो यह चल ही रहा है, हर नेता, बाबा, लेखक और विचारक कहता आया है तो बात सत्य ही होगी। इसलिए […]

एक दिन बस रुक जाना चाहिएइससे कोई फ़र्क़ नही पड़ता कि अब तक आप कितना चलेऔर कितना चलना बाक़ी है क्यों रुकना चाहिए?क्योंकि सिर्फ़ चलते रहनादरअसल एक प्रकार का थम जाना ही है हितेन्द्र अनंत

जब परदेस में हम एक ठिकाना बना लेते हैं, एक संसार खड़ा कर लेते हैं, तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि अपना देस कौन सा है? वह जिसे हम छोड़ आए हैं या वह जो हमसे अब आसानी से नहीं छूटेगा? इंसानों के अलावा क्या किसी जगह के भूगोल से एक रिश्ता नहीं […]

जूली एन्ड जूलिया (2009) यह दो सच्ची कहानियों और दो अलग-अलग किताबों पर आधारित फ़िल्म है। मेरा इसे देखने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह पाककला से जुड़ी कहानी है। जूलिया चाइल्ड  प्रसिद्ध अमेरिकन टेलीविजन कुक एवँ व्यंजनों की किताबों की लेखिका थीं। 1949 के आसपास  फ्रांस में अपने पति के साथ रहीं। […]

#कोरोना संकट से आपने क्या सीखा? #कम्युनिस्ट – इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि कम्युनिज़्म की ओर लौट चलो। #साजिश प्रेमी – इसकी साजिश, उसकी साजिश, उसकी साजिश, इसकी साजिश। #क़िताब वाले – यह सब हमारी आसमान से उतरी क़िताब में पहले ही लिखा था। क़िताब की ओर लौटो। #नास्तिक – कहाँ है? कहाँ […]

नेटफ्लिक्स पर देखी। यह बीसवीं सदी के ब्रिटेन की, काज़ुओ इशिगुरो (ब्रिटिश लेखक) के उपन्यास पर आधारित कहानी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले के कुछ दशकों और बाद के कुछ वर्षों  के घटनाक्रमों के इर्दगिर्द दरअसल यह एक बड़े रसूखदार ब्रिटिश सांसद की विशाल हवेली के बटलर की कहानी है। बटलर यानी पूरी हवेली का […]

नदी किनारेनारियल है रे भाईनारियल है रे टॉर्च की लाइट मेंटेम्परेचर है रे भाईटेम्परेचर है रे कैंडल की लाइट मेंटेम्परेचर है रे भाईटेम्परेचर है रे दिए की लाइट मेंटेम्परेचर है रे भाईटेम्परेचर है रे म्हारे कोरोना का कालटेम्परेचर है रे भाईटेम्परेचर है रे म्हारे मोदी जी मेंस्वैग है रे भाईस्वैग है रे नदी किनारेनारियल है […]

आपके लिए आसान होगा यह कहनाकि सब कुछ याद रखा जाएगामेरे लिए नहीं हैअब तक जो याद रखा हैऔर रोज़ जो जुड़ता जा रहा हैवह मुझे बहुत बीमार बना रहा है क्या करूंगा मैं याद रखकर?क्या कोई जंग जीत जाने के बादसज़ाएँ लिखूंगा और बख़्शीशें बाटूंगा?या स्वर्ग और नर्क के दरवाज़े परकहूँगा कि आप बाएँ […]