समझिए क्यों कृषि को कॉरपोरेट के हाथों में देना ख़तरनाक होगा मैं लाइसेंस-परमिट राज का समर्थक नहीं हूँ। लेकिन बात जब विश्व की चन्द बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की हो तो मुक्त बाज़ार या मुक्त व्यापार सिर्फ़ छलावा साबित हुए हैं। अमेज़न और फ्लिपकार्ट का असर अपने पड़ोस की मोबाइल बेचने वाली दुकान के मालिक से […]

कहानी आपबीती है। सच्ची है। एक अंकल और आंटी काफ़ी महीनों से, वो क्या कहते हैं, खाए हुए हैं। इंदौर का परिवार है। अंकल हमारे अब्बा हुज़ूर के सहपाठी हैं। पुणे में उनके बच्चे काम करते हैं। मेरे पास तब आए जब उनको मेरे इलाके में किराए का मकान चाहिए था। बोले मकान दिलवा दो। […]

द मेकिंग ऑफ़ – अ हिंदी कविता [कवि ने सोचा कि कविता लिखी जाएकविता में जनता के सरोकार होंग्राम्य जीवन की महक होइसलिए कवि ने लिखा] चरवाहों के बच्चेघूमते हैं सारा दिनहाथों में बाँसुरी और एक लाठी लिएहाँकते हुए बकरियों को (यहाँ पैसिव वॉइस में “बच्चे चरवाहों के” लिखा जा सकता  थाघूमते की जगह “भटकते […]

अफ़सर लिखे तो कविता हो जाती है वो गर्मी के दिन थेसड़क पर पिघल रहा था कोलतार(कवि क्या डामर है जो डामर लिखेगा?)उसके पैरों में नहीं थी चप्पलसर पर तपता सूरजहाथों में थैलामुट्ठी में सौ का नोटमन में सूची सामानों कीदिल में खौफ़ मालकिन काकि देर ना हो जाए अफसर ने लिखी यह कवितासर्वहारा वर्ग […]

धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन एक बात है और धर्मों की बुराई दूसरी। दूसरी बात से समाज में वैमनस्य बढ़ता है। धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन अवश्य किया जाना चाहिए। लेकिन इस बारे में लिखने में हर प्रकार की सावधानी बरतनी चाहिए। तुलनात्मक अध्ययन में आलोचना होगी ही। लेकिन उसे अकादमिक ईमानदारी से और सावधानीपूर्ण भाषा में […]

पाँच अगस्त २०२० का दिन मेरे लिए यूँ उसी तरह बीता जैसा हर दिन पिछले कुछ महीनों से बीत रहा है। लेकिन उस दिन चूँकि अयोध्या में रामलला के मंदिर का भूमिपूजन था, तो यह सोचने विचरने का दिन तो था ही। मेरी निजी स्थिति इस विषय पर ऐसी थी कि मैं उस दिन न […]

एक नज़ारा देखा। दस शराबी नशे में धुत्त थे। खुद को संभाल न पाएँ इतना अधिक नशा कर रखा था। सड़क पर वे शोर मचा रहे थे और आपस में लड़ रहे थे। एक आदमी जिसने कभी शराब नहीं पी या किसी मादक पदार्थ का सेवन नहीं किया, उनके बीच गया और उन्हें नशा करने […]

अगर मैं सोचूँ कि एक औसत भारतीय के लिए आदर्श व्यक्तित्व कौन है, तो उत्तर में दो नाम आते हैं। इनका आस्तिक – नास्तिक, या धार्मिक – तार्किक होने से कोई लेना देना नहीं है। ये दो नाम हैं बुद्ध और शिव। एक जिनके पास जीवन जीने का समग्र उपाय है, उनकी शिक्षा और उनका […]

चीन गलवान में एक से 1.5 किमी पीछे हटा है।यह हेडलाइन में नहीं बताया गया कि दोनों पक्ष पीछे हटने के लिए राजी हुए हैं। यानी कि भारत भी।चीन गलवान में तो पीछे हटा है लेकिन पैंगोंग त्सो में नहीं।इसलिए यह ख़बर थोड़ी राहत देने वाली है, लेकिन अभी इसे विवाद का समाधान नहीं माना […]

चीन घिर रहा है। भारत सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि अपनी ही हरकतों की वजह से। यह जानने के लिए आपको फ़ॉक्स न्यूज़ या इंडिया टीवी देखने की आवश्यकता नहीं। चीनी सरकार का अपना अख़बार ग्लोबल टाइम्स पढ़ लीजिए। इस अख़बार में बाक़ायदा कॉलम बने हैं, जिनमें चीन के साथ हाइफ़न में या तो […]