भारत की विदेश नीति के समक्ष इस समय एक बड़ी चुनौती है अफ़ग़ानिस्तान के बदलते हालात।  करीब बीस वर्षों के बाद अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी फौजों की पूर्णतः वापसी प्रारम्भ हो गई है। सितंबर ग्यारह २००१ के आतंकी हमलों के बाद अमेरिका ने अल क़ायदा से लड़ने और आतंकवाद के ख़िलाफ़ वैश्विक युद्ध के नाम पर […]

Locked inside a home, do you really feel “at home”? What is this thing that you call home? Is it people? Or culture, or geography, or even a period in time that would never return? Life is a friction between two desires – seeing the world, and coming home. The former takes precedence most of […]

दो पक्षों के बीच जब किसी विवाद की शुरुआत हो, तब उस बिंदु पर जाकर सही-ग़लत की व्याख्या की जा सकती है। लेकिन लम्बे चलने वाले हिसंक संघर्षों में अव्वल तो दो नहीं अनेक पक्ष बन जाते हैं, दूसरे इतनी हिंसा के बाद स्वाभाविक रूप से प्रत्येक पक्ष अनेक ग़लतियाँ या अपराध कर चुका होता […]

[Wrote this on 9th May 2021] I don’t want to spoil the day for you. But, please stop stereotyping mothers and women. Not all children are lucky to have loving, compassionate mothers. Many have their childhood destroyed because they had, let me write it with all the courage, a bad mother. Yes, that thing exists. […]

I don’t want to spoil the day for you. But, please stop stereotyping mothers and women. Not all children are lucky to have loving, compassionate mothers. Many have their childhood destroyed because they had, let me write it with all the courage, a bad mother. Yes, that thing exists. Stereotyping mothers is also unfair to […]

उन्हें जीते हुए राज्य गिनने दीजिएआपको लाशें गिनने का काम दिया गया हैआपसे उम्मीद है कि आप इंजेक्शन ढूंढते रहेंआपको चाहिए कि आप एम्बुलेंस में लेटे हुएहर अस्पताल के बाहर चक्कर लगाएँऔर पलंग न होने पर ठुकराए जाते रहेंआपको यह करना है कि अपनी दुकानें बंद रखेंनौकरियाँ ढूंढिए, न मिलें तो सब्ज़ी बेचिएऔर फिर भी […]

“कांग्रेस कल्चर” वो सच्चाई है जिसे भाजपा ने तहे दिल से अपना लिया है। पुलिस का बेज़ा इस्तेमाल किसने शुरू किया, होने दिया और उसे इंतेहा तक ले गए? इसलिए इन मामलों पर कम से कम वो दल आँसू न बहाए जो इन सबका जिम्मेदार है। पुलिस सुधार किसने वर्षों लागू नहीं किए? किसने औपनिवेशिक […]

यूनाइटेड किंगडम के उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में टैक्सी एग्रीगेटर एप उबर के ख़िलाफ़ फैसला दिया है कि उसकी टैक्सी चलाने वाले सभी चालक अब उसके कर्मचारी माने जाएंगे और वे सभी सेवानिवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा के लाभों के हक़दार होंगे। इस फैसले के भारत सहित पूरे विश्व में दूरगामी परिणाम होंगे। बाकी देशों […]

उदारवादी मध्यवर्ग के पास नायकों का अकाल है।इसलिए ज़रा सी अच्छी बात दिखते ही यह वर्ग किसी को भी नायक बना देने पर उतारू है। और जैसे ही कोई ज़रा सी खोट मिले, उसका नव-नायक तत्काल खलनायक में बदल जाता है।एक भाषण और मोहुआ मोइत्रा नायक। एक रोना और राकेश टिकैत नायक। कभी अन्ना हज़ारे […]

जिस शहर में मेरी ससुराल है, वहाँ एक दुकान है – “फलाने फोटो फ्रेम एण्ड जलेबी भण्डार”। पहली बार देखा तो बहुत हँसी आई थी। अब सोचता हूँ, क्या हुआ होगा? एक फोटो फ्रेम बनाने वाले ने सोचा, चलो इसी दुकान में जलेबी बनाकर क्यों न बेच लें? सीमेन्ट की फैक्ट्री वाले सेठ सीमेन्ट की […]