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Tag Archives: भ्रष्टाचार

बाबा के समर्थन से अण्णा बने प्रधानमंत्री!

25 जून 2012, नयी दिल्ली। गांधीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता किसन बाबूराव उर्फ अण्णा हजारे भारत के नये प्रधानमंत्री मनोनीत किये गये हैं। बीते महीने देश में हुए ऐतिहासिक मध्यावधि चुनावों के परिणाम आज घोषित कर दिये गये। गांधीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे के नेतृत्व में बनी जनलोकपाल पार्टी देश में सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में सामने आई है। जनलोकपाल पार्टी को प्रख्यात योग गुरू बाबा रामदेव के नेतृत्व में बनी भारत-स्वाभिमान पार्टी ने समर्थन देने की घोषणा पहले ही कर दी थी। भारत स्वाभिमान के समर्थन से जनलोकपाल पार्टी के लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त करने पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कल श्री हजारे को प्रधानमंत्री मनोनीत कर दिया। श्री हजारे आज दिल्ली के रामलीला मैदान में शपथ लेंगे। बाबा रामदेव की पार्टी के संसदीय दल के नेता श्री सुब्रह्मण्यम स्वामी उप-प्रधानमंत्री होंगे।

लोकसभा के 545 में से 543 सीटों पर बीते महीन हुए चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। जनलोकपाल पार्टी को 230 सीटें मिली हैं। वहीं 200 सीटों के साथ बाबा रामदेव की भारत स्वाभिमान पार्टी दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए और भाजपा के नेतृत्व वाले एन.डी.ए. को 30-30 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। शेष 53 सीटों पर निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों को विजय मिली है।

नये प्रधानमंत्री की घोषणाएँ:

प्रधानमंत्री मनोनीत होते ही श्री हजारे ने घोषणा की है कि जनलोकपाल कानून लागू करवाने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता देश में शराबबंदी की होगी। देश में जो भी व्यक्ति शराब का सेवन करते पाया जाएगा उसे पेड़ से बांधकर पीटा जाएगा। यदि शराब बंद होगी तो ही देश का विकास होगा ऐसा उनका कहना था। बाबा रामदेव द्वारा दिये गये समर्थन पर आभार व्यक्त करते हुए अण्णा ने कहा कि दोनों दलों का एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम भी बनाया जाएगा और यदि बाबा चाहें तो रोज सुबह उठकर जो भी नागरिक योग-प्राणायाम न करे उसे भी पेड़ से बांधकर पीटने की सजा दी जा सकती है। उल्लेखनीय है कि ऐसी सज़ा का सफल प्रयोग अण्णा अपने गाँव रालेगण सिद्धि में कर चुके हैं। श्री हजारे द्वारा की गयी अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ इस प्रकार हैं:

1. शिक्षा व्यवस्था में भी आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता। उन्होंने कहा कि “यह बड़े ही दुर्भाग्य का विषय है कि गांधी जी के देश मे बच्चों को सत्याग्रह की शिक्षा नहीं दी जाती। अब से स्कूलों में ही बच्चों को लंबे समय तक बिना बीमार हुए अनशन कैसे करें इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। अण्णा के सहयोगी अरविंद केजरिवाल को मानव-संसाधन मंत्री बनाया जाएगा। इस अवसर पर उपस्थित श्री केजरिवाल ने कहा कि सभी विश्वाविद्यालयों में कुलपति उन्हें ही नियुक्त किया जाएगा जिन्होंने मैगसेसे या नोबल पुरस्कारों में से कम से कम एक पुरस्कार जीता हो।

2. एक नयी सूचना क्रांति का आहवाहन। प्रत्येक भारतीय को इंटरनेट निःशुल्क प्रदान किया जाएगा। इसके बदले उन्हें फेसबुक और ट्विटर पर हमेशा ऑनलाईन रहना अनिवार्य होगा।

 

3. नये कानूनों का निर्माण। कपिल सिब्बल को चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव हराने वाले प्रशांत भूषण विधि मंत्री नियुक्त किये जाएंगे। अण्णा ने कहा कि श्री भूषण के पिता श्री शांति भूषण की अध्यक्षता में एक ड्राफ़्ट कमिटी बनायी जाएगी जो भारत के सभी कानूनों की समीक्षा कर नये कानूनों को लिखने का काम करेगी। जैसा भी यह कमिटी कहेगी अक्षरशः वैसा ही कानून संसद में बिना बहस के पारित करा लिया जाएगा।

4. कानून व्यवस्था में सुधार। काँग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी को अमेठी के चुनाव में हराने वाली डॉ. किरण बेदी को गृह मंत्री बनाया जाएगा। किरण बेदी का कहना था कि वे देश की सारी जेलों को तिहाड़ जेल की तरह सुधार गृह में परिवर्तित कर देंगी। ऐसा करने पर सभी अपराधी आप ही सुधर जाएँगे और अपराधों में कमी आएगी। देश की अदालतों में चल रहे मुकदमों को कम करने के लिये स्टार प्लस चैनल पर आने वाला किरण बेदी का कार्यक्रम “आप की कचहहरी” अब दूरदर्शन पर रोज़ 4 घंटे आएगा। स्वयं किरण बेदी इसमें जज बनकर मुकदमों का निपटारा कर देंगी। इससे अदालतों को काम के बोझ से काफी मुक्ति मिलेगी।

 

5. अल्पसंख्यकों का विकास होगा। अल्पसंख्यकों के विकास पर विशेष ध्यान देने की घोषणा करते हुए मनोनीत प्रधानमंत्री श्री अण्णा हजारे ने अल्पसंख्यकों के विकास हेतु गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा बनाये गये मॉडल की प्रशंसा की। हालाँकि अरविंद केजरिवाल के द्वारा टोकने पर बाद में अण्णा ने कहा कि उनकी बात को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुतु किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश को अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। वही अल्पसंख्यकों के विकास की योजना बनाएँगे।

6. सिंचाई हेतु नये बाँध बनेंगे। मेधा पाटकर को नया सिंचाई मंत्री बनाने की घोषणा करते हुए अण्णा ने कहा कि सुश्री पाटकर अब देश के हर गली-मोहल्ले में छोटे बाँधों का निर्माण करेंगी। इसके बाद भाखड़ा-नांगल समेत देश के सभी बड़े बाँधों को तोड़ दिया जाएगा।

बाबा रामदेव की प्रतिक्रिया:

भारत स्वाभिमान पार्टी के संस्थापक बाबा रामदेव का कहना था कि उन्होंने अण्णा हजारे को दो प्रमुख शर्तों पर समर्थन दिया है। पहली शर्त यह कि विदेशों में जमा देश का काला धन वापस लाया जाएगा। और दूसरी शर्त यह कि केंद्रीय मंत्रिमंडल सहित सरकार के सभी अधिकारी कर्मचारी प्रातः सार्वजनिक उद्यानों में आम जनता के साथ योगासन करेंगे। उन्होंने पेप्सी-कोला बंद करने और समलैंगिकता पर प्रतिबंध लगाने के लिये कानून लाने की भी माँग की है। सूत्रों का कहना है कि बाबा के प्रिय शिष्य आचार्य बालकृष्ण को स्वास्थ्य मंत्री बनाया जा सकता है। यह भी चर्चा है कि बाबा वेदप्रताप वैदिक को विदेश मंत्री और स्वदेशी अर्थव्यवस्था की स्थापना के लिये श्री के. एन. गोविन्दाचार्य को वित्त मत्री बनाने की भी बात अण्णा से मनवा चुके हैं।

 

सुब्रह्मण्यम स्वामी का बयान:

श्री स्वामी का कहना था कि उपप्रधानमंत्री बनते ही वे गाँधी परिवार की असलियत का पता लगाने के लिये एक आयोग का गठन करेंगे। 2 जी घोटाले जैसे घोटाले और ना हों इसके लिये देश के साधु-संतों से मार्गदर्शन लेकर वे नयी योजना बनाएँगे। आपने अमएरिका के हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालय अपने देश में भी शुरू करने की बात कही। आपने यह भी कहा कि जून 2011 में रामलीला मैदान में जिनपर लाठी चार्ज हुआ था उन्हें स्वत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाएगा।

काँग्रेस की प्रतिक्रिया:

काँग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने एन.डी.ए. की केवल तीस सीटें आने पर कहा कि इससे साबित होता है कि देश की जनता ने भाजपा को नकार दिया है। यह पूछे जाने पर कि उनके गठबंधन की भी इतनी ही सीटें आयी हैं और वे चुनाव हार गये हैं, श्री तिवारी ने कहा कि यह सब राष्ट्रीय स्वयं संघ और अमेरिका की खुफिया एजेंसी सी.आई.ए. का षढयंत्र है।

इधर काँग्रेस सूत्रों ने बताया कि इटली में अपने एक बीमार रिश्तेदार का हाल जानने के लिये श्रीमती सोनिया गांधी पुत्र राहुल गांधी, बेटी प्रियंका और दामाद रॉबर्ट के साथ फिलहाल रोम गयी हैं।

दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया:

काँग्रेस महासचिव श्री दिग्विजय सिंह का चुनाव परिणामों पर कहना था कि आर.एस.एस. की साजिश का शिकार हो चुका चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने में विफल रहा है। उनका कहना था कि पूरे देश में सलवा-जुड़ूम के कार्यकर्ताओं की दहशत की वजह से जनता ने काँग्रेस को वोट नहीं दिया। सलवा जुड़ूम को भी संघ की साजिश बताते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने से पहले नक्सली नेता आजाद ने उन्हें खुद फ़ोन करके बताया था कि नक्सलियों को मारने के लिये संघ के स्वयंसेवकों को एस.पी.ओ. बनाय जा रहा है और उन्हें बंदूकें दी जा रही हैं। इन्हीं एस.पी.ओ. की बंदूक के दम पर अण्णा और बाबा की पार्टियाँ चुनाव में जीत गयी हैं। हालाँकि श्री सिंह ने कहा कि आजाद के फोन कॉल की डिटेल्स अब बी.एस.एन.एल के पास उपलब्ध नहीं है। अतः वे अपनी बात को सिद्ध नहीं कर सकते।

 

गडकरी की फिर फिसली ज़ुबान:

भाजपा अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर विवादासपद बयान दिया। चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि “काँग्रेस पार्टी बिल्ली की औलाद है”। हालाँकि बाद में श्री गडकरी ने अपने बयान पर माफी भी माँग ली। चुनाव हारने के मुद्दे पर पूछे जाने पर उनका कहना था कि वे पहले नागपुर जाएँगे। घर पर कुछ समय विश्राम करने के बाद वे संघ मुख्यालय जाएँगे। वहाँ जैसा बताया जाएगा, वैसा बयान मीडिया को उपलब्ध करा दिया जाएगा।

 

 

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ठीक है भाई रख लो उपवास! लेकिन इससे फर्क क्या पड़ेगा?

जीमेल पर चैट पर एक मित्र ने बीते दिन संपर्क किया:

मित्र: तुमने भी उपवास रखा है?

हाँ, लेकिन ‘भी’ क्यों लिख रहे हो? क्या तुमने भी रखा है?

मित्र: नहीं। लेकिन क्यों रखा है उपवास?

कल रात रामलीला मैदान में जो महिलाएँ और बच्चे थे, उन पर तब लाठियाँ बरसायीं गयीं जब वो सो रहे थे। मैं इससे दुःखी हूँ। इसलिये उपवास रखा है।

मित्र: लेकिन उपवास क्यों? इससे क्या होगा?

अब होगा क्या यह तो मुझे भी नहीं मालूम। लेकिन मैं और कुछ नहीं कर सकता, तो कम से कम उपवास रखकर समर्थन तो दे सकता हूँ।

मित्र: अरे भाई, तुम्हारे उपवास रखने से क्या होगा, मुझे बताओ अगले दस दिन में इससे क्या परिवर्तन आ जाएगा?

परिवर्तन तो आ रहा है। इतने लोग जागरूक हो रहे हैं। इससे पहले कभी, पढ़े-लिखे मध्य वर्ग को अपने खर्च पर इस तरह दिल्ली मे देश के लिये जमा देखा है?

मित्र: तुम क्या सोचते हो बाबा के ऐसा करने से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा?

पूरा तो कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन उसे सहन करने और उसके आगे घुटने टेक देने का विचार तो खत्म होगा।

मित्र: मुझे नहीं लगता बाबा ईमानदार है।

मुझे तो लगता है। वो संन्यासी है, पैसे यदि कमा भी ले, तो उसका क्या उपभोग कर सकते हैं? न हमारे जैसा पहनना, न खाना, भूमि पर सोना।

मित्र: लेकिन बाबा राजनीति में आना चाहता है।

आने दो। चोर-उचक्के, कातिल, अभिनेता, खिलाड़ी, उद्योगपति, पत्रकार कौन नहीं है राजनीति में?

मित्र: लेकिन बाबा का तरीका ठीक नहीं है। अब क्या अनशन के दम पर हर काम कराए जाएँगे?

हर काम कराएँ जाएँ ये कौन कह रहा है? पर जिन कामों की मांग की गयी है, वो भी तो सरकार कर नहीं रही। सोयी हुई सरकार को जगाना है। सरकार अच्छी हो, ईमानदार हो, गरीब की सुने, विकास करे, तो ऐसे मांगे मंगवाना गलत है। लेकिन ऐसी भ्रष्ट सरकार?

मित्र: लेकिन सन्यासियों का काम है कि धर्म से जुड़े रहें, और धर्म की बात करें।

और धर्म की बात है क्या? सत्य, अहिंसा, सदाचरण, अपरिग्रह। क्या ये धर्म की बातें नहीं है? वैसे भी प्राचीनकाल से लेकर आज तक ऋषियों ने, संन्यासियों ने राजा और जनता को उसका कर्तव्य याद दिलाने का काम किया है। उन्हें रास्ता दिखाया है। इसमें गलत क्या है?

मित्र: लेकिन इससे होगा क्या? चुनाव में तो यही लोग जीत जाएँगे।

इसी को तो रोकना है।

मित्र: इतनी महँगाई थी, भ्रष्टाचार था, फिर भी ‘ये’ लोग पिछली बार चुनकर वापस आ गये। आना तो ‘उन्हें’ चाहिये था।

प्रश्न इनका या उनका नहीं है। प्रश्न है मतदाता तक ये जानकारी पहुँचाना कि कौन गलत है, कहाँ गलत है और कितना गलत है। मतदाता मूर्ख नहीं है। हाँ वो गलत प्रचार का शिकार हो सकता है।

मित्र: मैं नहीं मानता। अन्ना ने भी कहा है, लोग पैसे लेकर वोट देते हैं।

देते हैं। लेकिन सभी नहीं। और जो लेते हैं, वो भी कई बार सही चुनाव कर आते हैं। इस देश में इन्दिरा गांधी को भी चुनाव हारना पड़ा था।

मित्र: तो बाबा चुनाव क्यों नहीं लड़ते?

पहले यह बताओ क्या तुमने भ्रष्टाचार के विरूद्ध कोइ रैली की है?

मित्र: नहीं।

पूरे देश में कोइ यात्रा की, अभियान चलाया?

मित्र: नहीं।

आजतक कोइ चुनाव तुमने लड़ा?  

मित्र: नहीं।

बाबा कम से कम जागरूकता तो ला रहे हैं। चुनाव लड़ें तो स्वागत है। न लड़ें तो कोई बात नहीं।

मित्र: कल अगर पता चले कि बाबा ईमानदार नहीं, तो क्या? फिर उनकी चिट्ठी वाली बात का क्या जो कपिल सिब्ब्ल ने सार्वजनिक की?

कल को ऐसा हुआ, तो हमारा देश, जो कई दशकों से एक ईमानदार नेतृत्व का भूखा है, फिर से एक सच्चे नेतृत्व की खोज में जुट जाएगा। ये तो सच्चा प्यार तलाशने के जैसा है। जिससे दिल लग गया, लग गया। उसने धोखा दिया तो पहले रो लेंगे। फिर उसे भुला देंगे। पर क्या इस डर से दीवानगी छोड़ दें?

चिट्ठी वाली बात से ये तो पता चलता है कि सरकार और बाबा कुछ बातें कर रहे थे। लेकिन बड़ी लड़ाईयों में छोटी सन्धियाँ दुश्मन से भी करनीं पड़ती हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज ने कितनी ही संधियाँ मुस्लिम शासकों से की थीं। ये रणनीति है। बाबा फँस गये, क्योंकि वो सरल हैं, कूटनीति करने का प्रयास उन्होंने किया लेकिन कर नहीं पाये।

मित्र: लेकिन बाबा के लिये तुम उपवास रखो इससे क्या होगा?

मैं रामलीला मैदान में हुए पुलिसिया अत्याचार के विरोध में उपवास पर हूँ। मेरा कारण निजी है। यदि मैं दिल्ली नहीं जा सकता, इतना साहसी नहीं कि अपनी नौकरी छोड़कर सड़कों पर प्रदर्शन करूं, तो कम से कम उपवास तो रख सकता हूँ।

मित्र: ठीक है भाई रख लो उपवास। लेकिन इससे फर्क क्या पड़ेगा?

 

-हितेन्द्र

 
 

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मेरा नेता चोर है, अत्याचार घनघोर है,

मेरा नेता चोर है, अत्याचार घनघोर है,

सन्यासी है गिरफ्तार, और भ्रष्टों का जोर है||

 

भोले-भाले मानस का

चुरा लिया है पैसा,

खुद चाटें मलाई हम पर,

महँगाई का जोर है॥मेरा नेता चोर है…

 

देशद्रोही को दिल्ली में बना रहे मेहमान,

हत्यारों को ‘ओसामा-जी’ कहकर बुला रहे भगवान।

माता-बहनों से दुराचार, सोते बच्चों पर प्रहार

‘हितेन्द्र’ भारतवासी पर लाठी डंडे का जोर है॥ मेरा नेता चोर है…

 

खुद महलों में रहने वालों को

हमारे सर पर पंडाल न भाए,

ये वो हैं जो हमारे हक का

दाना-पानी चोर खाएं

ऐसे चोर उचक्कों पर करना आक्रमण कठोर है॥

गली गली में शोर है, मेरा नेता चोर है

अत्याचार घनघोर है, मेरा नेता चोर है॥ मेरा नेता चोर है…

 

-हितेन्द्र

 

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