तिरछी नजरिया के प्रिय पाठंकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! दीपावली पर भेंट स्वरूप इस छत्तीसगढ़ी गीत का आनंद लें।
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हाय रे कुंदरु करेला,
मोर छैला
अलबेला मोर तीर आजा
मोर तीर आजा राजा
खवाहूं बीरो पान।
हाय रे पड़की परेवना मोर
कोईली मैना मोर तीर [...]
November 10, 2007
Categories: Time Pass (फ़ुरसत से) . Tags: , गीत, छत्तीसगढ़ी, दीपावली, chhattisgarhi, diwali, hindi, poem . Author: hsonline . Comments: 2 Comments
नक्सल्वाद और बस्तर India’s War in the Woods
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या गंभीर है। आम आदिवासी सरकार और नक्सलियों की लड़ाई में पिस रहा है। हज़ारों आदिवासी ऐसे हैं जो विभिन्न शरणार्थी शिविरों में किसी तरह जीवन काट रहे हैं। गाँव के गाँव उजड़ चुके हैं। और एक प्रकार का गृह युद्ध सा चल पड़ा [...]
November 7, 2006
Categories: Information, Time Pass (फ़ुरसत से) . . Author: hsonline . Comments: 1 Comment
हिन्दी प्रेमियों विशेषकर वे जो इंटरनेट पर हिन्दी की उपस्थिति के लिये चिंतित रहते हैं, के लिये यह अच्छा समाचार है। भारत सरकार के टीडीआईएल यानी “भारतीय भाषाओं के तकनीकी विकास” प्रकल्प के ‘क़ॉइलनेट’ कार्यक्रम के अंतर्गत हिन्दी और लोकभाषाओं के प्राचीन और आधुनिक साहित्य को इंटरनेट पर उपलब्ध कराया गया है। देश के विभिन्न [...]
October 16, 2006
Categories: Information, Time Pass (फ़ुरसत से) . . Author: hsonline . Comments: 4 Comments
प्रद्युम्नसिंह नाम का एक राजा था। उसके पास एक हंस था। राजा उसे मोती चुगाया करता और बहुत लाड़-प्यार से उसका पालन किया करता। वह हंस नित्य प्रति सायंकाल राजा के महल से उड़कर कभी किसी दिशा में और कभी किसी दिशा में थोड़ा चक्कर काट आया करता। एक दिन वह हंस उड़ता हुआ नीवनजी [...]
October 5, 2006
Categories: Time Pass (फ़ुरसत से) . . Author: hsonline . Comments: 1 Comment
भानु चौधरी अपने गॉँव के मुखिया थे। गॉँव में उनका बड़ा मान था। दारोगा जी उन्हें टाटा बिना जमीन पर न बैठने देते। मुखिया साहब को ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मर्जी बिना गॉँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। कोई घटना, चाहे, वह सास-बहु का विवाद हो, चाहे मेड़ या [...]
September 27, 2006
Categories: Story (कहानी), Time Pass (फ़ुरसत से) . . Author: hsonline . Comments: No Comments
बड़े घर की बेटी
बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गॉँव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गॉँव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति-स्तंभ थे। कहते हैं इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में अस्थि-पंजर [...]
September 27, 2006
Categories: Story (कहानी), Time Pass (फ़ुरसत से) . . Author: hsonline . Comments: 1 Comment