दासत्व की ओर…The Raod to Serfdom

Friedrich August von Hayek  फ्रेडरिक ऑगस्ट हायेक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और चिंतक थे। वे उदार लोकतंत्र और मुक्त बाज़ार के पैरोकार थे। 1974 में उन्हें अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार उनके वैचारिक प्रतिद्वंदी गुन्नार मिरडाल के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। हायेक का विचार था कि समाज में निर्णायक शक्ति एक मुक्त बाज़ार के हाथ होनी चाहिये। [...]

We need a revolution in the education system in India?

Education builds the man so it builds the nation. Today we claim to be the biggest human resources supplier for the world, but are we concerned what quality of human capital we are building and for whose needs? We supply bureaucrats to the government, software engineers to the IT companies around the world, highly paid [...]

एकाग्रता एक मिथक है।

ज़माना भी बड़ा जालिम है क़सम से। कहता है भैया एकाग्र रहो, उसी में सार है। बच्चों को एकाग्रता के तरीक़े सिखाये जाते हैं। कुछ बड़े भी आजमा लेते हैं गुरुजी-वुरुजी के प्रवचन में या क़िताबों में पढ़ के। अच्छा है।
पर क्या एकाग्रता एक अपराध नहीं है?
एक दृष्टिहीन कितनी चीज़ें देख सकता है? और एक [...]