समर ऑफ़ सिक्स्टी नाइन क्या है?
यह आंग्लभाषा का एक महाप्रसिद्ध गीत है। (इसका अर्थ होता है ” ६९ की गर्मी” जिसका तात्पर्य है सन १९६९ की गर्मी के दिन) वैसे ये रूपांतर आपको तब अच्छी तरह समझ आएगा जब आपने समर ऑफ़ सिक्स्टी नाइन सुना हो। इसे सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें।
इसे [...]
October 31, 2006
Categories: My Poems (कविताएँ) . . Author: hsonline . Comments: 4 Comments
कुछ वर्ष पूर्व अंग़्रेज़ी में मैंने एक कविता लिखी थी। यह उसका हिन्दी अनुवाद है:
समय का फ़्लाई-ओवर
एक शहर है,
वहाँ छपते हैं अख़बार और पढ़े भी जाते हैं
अख़बार में छपी ख़बर नयी
शहर के बीच बना एक नया फ़्लाई ओवर
नामकरण को लेकर उदघाटन रूका हुआ था जिसका
खोल दिया गया है आज से जनता के लिये
शहर की [...]
October 14, 2006
Categories: My Poems (कविताएँ) . . Author: hsonline . Comments: 1 Comment
इंटरनेट यानी अंतरज़ाल पर हिन्दी साहित्य के जो भी मोती उपल्ब्ध हैं, उन्हें एक स्थान पर लाने का प्र्यत्न कर रहा हूँ। महाकवि हरिवंश राय बच्चन जी की ये रचना आज भी युवा हृदयों की साम्राज्ञी है।
मधुशाला
मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ [...]
September 27, 2006
Categories: My Poems (कविताएँ) . . Author: hsonline . Comments: 1 Comment
यह कुछ सुंदर हिन्दी कविताओं का संग्रह है। इनमें मेरे प्रिय कवि गोपालदास नीरज की दो कवितायें भी सम्मिलित हैं।
ऐसी और भी कवितायें “तिरछी नजरिया” पर शीघ्र ही आयेंगी।
कारवाँ गुज़र गया
स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!नींद भी [...]
September 26, 2006
Categories: My Poems (कविताएँ) . . Author: hsonline . Comments: 4 Comments
वो एक सुबह थी नयी सुबह
जब आलस भीतर का टूटा
एक दाग़ था वो छूटा
जब बरसों की आदत छोड़्कर
निकल पड़ा मैं
तड़के सुबह पाँच बजे सैर पर
दौड़ लगायी मील भर
और चटकायीं कुछ हड्डियाँ
यानी कुछ व्यायाम किया
आज के दिन
ये वचन दिया स्वयं को
कि आलस्य से कोसों दूर
ताज़गी से भरपूर
मेरे भी साहसी जीव होने का
यह जो प्रमाण है
सुबह सैर पर [...]
September 12, 2006
Categories: My Poems (कविताएँ), Time Pass (फ़ुरसत से) . . Author: hsonline . Comments: 2 Comments
समर ऑफ़ सिक्स्टी नाइन क्या है?
यह आंग्लभाषा का एक महाप्रसिद्ध गीत है। (इसका अर्थ होता है ” ६९ की गर्मी” जिसका तात्पर्य है सन १९६९ की गर्मी के दिन) वैसे ये रूपांतर आपको तब अच्छी तरह समझ आएगा जब आपने समर ऑफ़ सिक्स्टी नाइन सुना हो।
इसे किसने लिखा है?
ब्रायन एड्म्स ने, जो समझ लो [...]
April 21, 2006
Categories: My Poems (कविताएँ) . . Author: hsonline . Comments: 3 Comments