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Archive for the ‘Information’ Category

उद्यमिता पर नया चिट्ठा “The Entrepreneur” और तीस हज़ार पाठक

In Current Issues (सामयिक), Information, इन दिनों...These Days... on October 5, 2008 at 8:56 pm

तिरछी नजरिया पिछले एक वर्ष से रूकी हुई सी थी। यद्यपि पाठकों का आना नहीं रूका। अब पुनः तिरछी नजरिया एक नये उद्देश्य के साथ सक्रिय होने जा रही है। प्रसंग यह कि मैंने आंग्लभाषा में उद्यमिता यानी  EntrePreneurship पर नया चिट्ठा  The Entrepreneur प्रारंभ किया है। नयी सदी में भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाना है तो एक प्रमुख आवश्यक्ता यह है कि हमारे यहाँ अधिक से अधिक लोग स्वयं की राह चुनें। नौकरी पर निर्भर न होकर साहस के साथ अपने विचार को, अपनी कल्पनाओं को सच्चा बनाएँ। ऐसा क्यों है कि दुनिया के ज़्यादातर ब्रांड पश्चिमी हैं? मैक्डॉनल्ड्स, जनरल मोटर्स, फोर्ड, जनरल इलेक्ट्रिक, सिटी बैंक, कॆलॉग्स, माइक्रोसॉफ्ट, एप्प्ल, डेल, ये सब भारत में क्यों नहीं हुए? भारत के उत्पाद और भारत के ब्रांड जब दुनिया भर में अपना नाम करेंगे, तो हमारी अर्थव्यवस्था को नयी गति मिलेगी। और हमारे समाज की नौकरी पर निर्भरता की मानसिकता भी दूर होगी। हमारा सकल घरेलू उत्पाद तब और अधिक गति से आगे बढ़ेगा जब हमारे लोग उत्पादन करेंगे ना कि नौकरी। उद्यमिता व्यवसाय से भिन्न है। उद्यमी वह होता है जो पैसे बनाने कि बजाय एक विचार को सफल बनाना चाहता है और एक सफ़ल संस्थान को खड़ा करता है। वह रोज़गार नहीं ढूंढता बल्कि रोज़गार के अवसर निर्मित करता है। ये रास्ता कठिन होता है। और इसमें आने वाली मुश्किलें पीछे की ओर खींचतीं हैं। लेकिन कुछ लोग हैं जो पीछे मुड़कर नहीं देखते, जैसे धीरू भाई अंबानी, सुनील भारती मित्तल, नारायन मूर्ती, या जैसे लक्ष्मी निवास मित्तल। ये ऐसे लोगों की कथाएँ हैं जो प्रेरक हैं और प्रसिद्ध हैं। किंतु उन कथाओं का क्या जो अख़बारों में छपा नहीं करतीं? उन लोगों का क्या जिन्हें ऐसे रास्ते पर जाने के लिये, या ऐसे रास्ते के बीच सहायता की या मार्गदर्शन की जरूरत है? इन्हीं सब उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्र कपिल विधानी के साथ इस नये चिट्ठे “The Entrepreneur” की शुरुआत की है। चिट्ठा अंग्रेजी मैं है, किंतु समस्त चर्चा हिन्दी में तिरछी नजरिया पर अनूदित की जायेगी। खुशी की खबर यह है कि अपने प्रारंभ होने के दो वर्ष और कुछ महीनों के भीतर ही तिरछी नजरिया को तीस हज़ार से अधिक पाठकों का प्यार हासिल हुआ है। एक अच्छी शुरुआत के पहले ये एक अच्छी ख़बर है। 

आप सभी इस नये चिट्ठे को पढ़ेंगे ऐसी अपेक्षा है। यूं हिन्दी में तिरछी नजरिया पर सब कुछ उपलब्ध रहेगा। 

-हितेन्द्र.

NO TITLES, NO POSTS

In Information on January 29, 2007 at 7:35 pm

As I am  quite bussy these days, there will be no posts on this blog til februray 2007.

नक्सल्वाद और बस्तर India’s War in the Woods

In Information, इन दिनों...These Days... on November 7, 2006 at 8:24 pm

नक्सल्वाद और बस्तर India’s War in the Woods

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या गंभीर है। आम आदिवासी सरकार और नक्सलियों की लड़ाई में पिस रहा है। हज़ारों आदिवासी ऐसे हैं जो विभिन्न शरणार्थी शिविरों में किसी तरह जीवन काट रहे हैं। गाँव के गाँव उजड़ चुके हैं। और एक प्रकार का गृह युद्ध सा चल पड़ा है। क्योंकि सरकार और नेता प्रतिपक्ष श्री महेन्द्र कर्मा द्वारा समर्थित आंदोलन(?) सलवा जुड़ुम अर्थात शांतिपूर्ण मार्च के तहत आदिवासी युवकों के एसपीओ यानी विशेष पुलिस अधिकारी बना दिया गया है। इन एसपीओ, जिनमें अनेक तो किशोरवय हैं, के हाथ में बंदूक गुटीय हिंसा और अराजकता को बढ़ावा दे रही है। बस्तर के जंगलों में नक्सलियों से लड़ाई के लिये पहले ही अनेक केंद्रीय बल तैनात हैं। इनके अलावा सलवा जुड़ुम के सिपाही भी हैं। यह सब मिलकर बस्तर में एक अंतहीन प्रतीत होते हिंसक संघर्ष को जन्म दे चुके हैं। प्रस्तुत वीडियो कहानी का कुछ हिस्सा उजागर करता है। चूँकि यह यू ट्यूब पर दिखायी दिया तो इसे प्रकाशित करना उचित समझा। यद्यपि इस विषय में छत्तीसगढ़ में काफ़ी बहस हो रही है, शांति का कोइ रास्ता निकलता दिखायी नहीं देता।

एक दिन के इंस्पेक्टर साहब और रेल की सड़क यात्रा

In Information on November 3, 2006 at 11:57 am

HIndurail

पहला चित्र आठ साल के बालक महक कोठारी का है जो किसी गंभीर रोग से पीड़ित है।

महक का सपना है कि वो बड़ा होकर पुलिस अधिकारी बने। उसका यह सपना पूरा हुआ जब हैदराबाद पुलिस ने एक दिन के लिये उसे इंस्पेक्टर बना दिया। जुबली हिल्स थाने में महक ने पदभार ग्रहण किया। उन्हें यह पद सौंपा थाने के इंस्पेक्टर एम. श्रीनिवास राव ने। इसके पहले महक ने पद ग्रहण करने के पूर्व डीजीपी श्री स्वर्णजीत सिंह से मुलाकात की। मैं गुंडों को खत्म करके लोगों को बचाउंगा यह शब्द थे तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले बालक महक के। हैदराबाद पुलिस के लिये मानो यह एक ऐसा काम था जिससे उन्हें गर्व और संतोष की अनुभूति हुई। यह सारी कार्यवाही महक के माता पिता ने अश्रुपूरित नयनों से देखी। धन्यवाद है हैदराबाद की मेक-अ-विश फाउंडेशन और हैदराबाद पुलिस का जिन्होंने महक का यह सपना साकार किया। पूरी खबर आप यहाँ से पढ़िये।  

दूसरा चित्र है एक अनोखी यात्रा का जो रेलगाड़ी के डिब्बे कर रहे हैं मैंदानों से कश्मीर घाटी तक। भारतीय रेल के इतिहास में यह पहली बार है जब रेल के डिब्बे सड़क से कहीं पहुँचाये गये हैं।पढ़िये यहाँ से।

विज्ञान प्रसार का हिन्दी जालस्थल

In Information on October 29, 2006 at 12:09 pm

भारत सरकार के द्वारा 1989 में स्थापित संस्था “विज्ञान प्रसार” का कार्य विज्ञान को आम लोगों विशेषकर बच्चों में लोकप्रिय बनाना है। विज्ञान प्रसार की हिन्दी पत्रिका “विज्ञान प्रगति” जिन्होंने पढ़ी होगी वे अवश्य इससे परिचित होंगे। किंतु वि.प्र. के जालस्थल में अनेक कमियाँ भी दिखायी देती हैं। ऐसा अकसर होता है कि सरकार के हिन्दी को बढ़ावा देने के उपक्रम मूलतः प्रतीकात्मक रह जाते हैं। यही कारण है इस जाल-स्थल पर अधिकांश सामग्री अंग्रेजी में है और केवल बाहरी लिंक हिन्दी में हैं। यद्यपि प्रयास सराहनीय है। किंतु अच्छा होता यदि अंदर की सामग्री भी हिन्दी में होती।

 भाषा के प्रश्न को छोड़ दें तो यदि आप विज्ञान में रूचि रखते हैं या अपने घर परिवार के बच्चों को विज्ञान की सरल-सुलभ जानकारी देना चाहते हैं तो एक बार इस जाल-स्थल पर अवश्य जाएँ।

विज्ञान प्रसार के जाल-स्थल पर जाने के लिये यहाँ क्लिक करें।

vigyan-prasar.jpg

डिजिटल सांस्कृतिक संपदा पुस्तकालय

In Information, इन दिनों...These Days... on October 16, 2006 at 6:05 pm

हिन्दी प्रेमियों विशेषकर वे जो इंटरनेट पर हिन्दी की उपस्थिति के लिये चिंतित रहते हैं, के लिये यह अच्छा समाचार है। भारत सरकार के टीडीआईएल यानी भारतीय भाषाओं के तकनीकी विकास प्रकल्प के क़ॉइलनेट कार्यक्रम के अंतर्गत हिन्दी और लोकभाषाओं के प्राचीन और आधुनिक साहित्य को इंटरनेट पर उपलब्ध कराया गया है। देश के विभिन्न राज्यों के चुनींदा विश्वविद्यालयों के सहयोग से यह कार्य किया गया है। इस प्रकल्प के पीछे जो भी हैं वे साधुवाद के पात्र हैं।

संपूर्ण पुस्तकालय के लिये यहाँ क्लिक करें।

इस पोस्ट में पुस्तकालय की संपूर्ण विषय सूची दी जा रही है। ताकि यदि इतना पढ़ने पर भी आप नये लिंक पर न जा रहे हों तो शायद विषय सूची देखकर ही आप को लालच हो। पर ध्यान रहे विषय सामग्री इतने काम की है कि शायद ही आप सब कुछ अपने कंप्यूटर में सुरक्षित करने से चूकें। हाँ वर्तनी की त्रुटियाँ हैं पर कार्य की महानता और सार्थकता अधिक महत्वपूर्ण है।   

पारम्परिक साहित्य

·         बुद्ध की कहानियाँ

·         हितोपदेश

·         पन्चतंत्र

·         सिंहासन बत्तीसी 

मौखिक महाकाव्य

लोक साहित्य

·         वाराणसी वैभव

·         मगध

·         वैदह वैभवमिथिला- वैभव

·         ब्रज वैभव

राजस्थान·           ·         मेवाड़ ·         मारवाड़ ·         बाड़मेर ·         जैसलमेर ·         बीकानेर ·         अलवर ·         फड़ परम्परा देवनारायण ·         रबारी कढ़ाइ  उत्तर प्रदेश

काशी की विभूतियाँ राम कथा की विदेश-यात्रा

कवि एवं लेखक·         महाकवि विद्यापति ठाकुर ·         कबीर ·         अमीर ख़ुसरो दहलवी ·         मलिक मुहम्मद जायसी ·         रसखान ·         अब्दुर्रहीम खान खाना ·         तुलसीदास ·         सूरदास ·         मीराबाई ·         केशवदास ·         चन्द्रवरदाइ प्रेमचन्ददक्खिनी हिन्दीलेख, डिजिटल चित्र, श्रृव्य, चलचित्र पुस्तकें:

  उत्तरांचल:·         झारखण्ड:

·झारखण्ड प्रदेश और ग्रामीण प्रशासन

 छत्तीसगढ़

·         छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के बीच सामान्य जन का मसीहा “कबीर

·         छत्तीसगढ़ – एक आधुनिक नाम

बिहारबिहार एक सांस्कृतिक परिचय

मगध

मिथिला- वैभव

o        युगान्तर

o        अक्षर-अक्षर अमृत

o        महाकवि विद्यापति ठाकुर

o        कल्याणी कोश

मध्य प्रदेश 

सामान्य ज्ञान पर मेरे व्याख्यान्

In Information on March 11, 2006 at 9:35 pm

सामान्य ज्ञान पर मेरे पावर पाइंट व्याख्यान डाउनलोड करें :-

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