दासत्व की ओर…The Raod to Serfdom
Friedrich August von Hayek फ्रेडरिक ऑगस्ट हायेक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और चिंतक थे। वे उदार लोकतंत्र और मुक्त बाज़ार के पैरोकार थे। 1974 में उन्हें अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार उनके वैचारिक प्रतिद्वंदी गुन्नार मिरडाल के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। हायेक का विचार था कि समाज में निर्णायक शक्ति एक मुक्त बाज़ार के हाथ होनी चाहिये। सरकार का कार्य केवल इस मुक्त अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना एवँ नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना होना चहिये। उनकी एक प्रसिद्ध किताब है ” द रोड टु सर्फडम” यानी दास्त्व की ओर ले जाने वाली राह। स्टालिन और हिटलर जैसे तानाशाहों के विचारों की इस किताब में आलोचना की गयी है। इस किताब को यहाँ संक्षिप्त रूप में चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। किताब पढ़ने के लिये यहाँ से डाउनलोड करें। Please Click Here to Download “The Road to Serfdom”.



















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हितेन्द्र जी, धन्यवाद हायेक के विचार से सहमत हुआ जाना चाहिए. यह विचार सही है कि निर्णायक शक्ति मुक्त बाज़ार के हाथ हों. सरकार का काम सुचारू रूप से चलाना हो.
मेरी चिंता से आप संभवत सहमत होंगे कि भारत जैसे देश में जो संक्रमणकाल से गुज़र रहा है.. यहां सरकारों को अपना सुचारू रूप से चलने का दायित्व बोध भी नहीं है. जनता के हितों पर मुक्त बाज़ार कुठाराघात न करे.. इसका ध्यान देना परम आवश्यक है. मैं कोई उदारीकरण का कट्टर विरोधी नही हूं. व्यक्तिगत तौर पर चर्चा हेतु आप सादर आमंत्रित हैं. कृपया संपर्क करें जी मेल पर neerajdiwan
I think we need to update ourselves. The greatest free market hawk of our time- Thomas Freedman believes that we are living now in post-postcold war era. World has seen and experienced the games of ‘free’ market very closly. Enron is just one example.
No more Neocon crap please!