नक्सल्वाद और बस्तर India’s War in the Woods

नक्सल्वाद और बस्तर India’s War in the Woods

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या गंभीर है। आम आदिवासी सरकार और नक्सलियों की लड़ाई में पिस रहा है। हज़ारों आदिवासी ऐसे हैं जो विभिन्न शरणार्थी शिविरों में किसी तरह जीवन काट रहे हैं। गाँव के गाँव उजड़ चुके हैं। और एक प्रकार का गृह युद्ध सा चल पड़ा है। क्योंकि सरकार और नेता प्रतिपक्ष श्री महेन्द्र कर्मा द्वारा समर्थित आंदोलन(?) सलवा जुड़ुम अर्थात शांतिपूर्ण मार्च के तहत आदिवासी युवकों के एसपीओ यानी विशेष पुलिस अधिकारी बना दिया गया है। इन एसपीओ, जिनमें अनेक तो किशोरवय हैं, के हाथ में बंदूक गुटीय हिंसा और अराजकता को बढ़ावा दे रही है। बस्तर के जंगलों में नक्सलियों से लड़ाई के लिये पहले ही अनेक केंद्रीय बल तैनात हैं। इनके अलावा सलवा जुड़ुम के सिपाही भी हैं। यह सब मिलकर बस्तर में एक अंतहीन प्रतीत होते हिंसक संघर्ष को जन्म दे चुके हैं। प्रस्तुत वीडियो कहानी का कुछ हिस्सा उजागर करता है। चूँकि यह यू ट्यूब पर दिखायी दिया तो इसे प्रकाशित करना उचित समझा। यद्यपि इस विषय में छत्तीसगढ़ में काफ़ी बहस हो रही है, शांति का कोइ रास्ता निकलता दिखायी नहीं देता।

1 Comment(s)

  1. Comment by umesh soni on June 10, 2007 11:50 pm

    नक्सली हिंसा रोकने मे वे कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता भूमिका निभा सकते है जो नक्सलियो के खूनी सँघ्रष का विरोध नही करते |

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