दासत्व की ओर…The Raod to Serfdom

Friedrich August von Hayek  फ्रेडरिक ऑगस्ट हायेक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और चिंतक थे। वे उदार लोकतंत्र और मुक्त बाज़ार के पैरोकार थे। 1974 में उन्हें अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार उनके वैचारिक प्रतिद्वंदी गुन्नार मिरडाल के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। हायेक का विचार था कि समाज में निर्णायक शक्ति एक मुक्त बाज़ार के हाथ होनी चाहिये। [...]

नक्सल्वाद और बस्तर India’s War in the Woods

नक्सल्वाद और बस्तर India’s War in the Woods

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या गंभीर है। आम आदिवासी सरकार और नक्सलियों की लड़ाई में पिस रहा है। हज़ारों आदिवासी ऐसे हैं जो विभिन्न शरणार्थी शिविरों में किसी तरह जीवन काट रहे हैं। गाँव के गाँव उजड़ चुके हैं। और एक प्रकार का गृह युद्ध सा चल पड़ा [...]

एक दिन के इंस्पेक्टर साहब और रेल की सड़क यात्रा

पहला चित्र आठ साल के बालक महक कोठारी का है जो किसी गंभीर रोग से पीड़ित है।
महक का सपना है कि वो बड़ा होकर पुलिस अधिकारी बने। उसका यह सपना पूरा हुआ जब हैदराबाद पुलिस ने एक दिन के लिये उसे इंस्पेक्टर बना दिया। जुबली हिल्स थाने में महक ने पदभार ग्रहण किया। उन्हें यह [...]