कुछ वर्ष पूर्व अंग़्रेज़ी में मैंने एक कविता लिखी थी। यह उसका हिन्दी अनुवाद है:
समय का फ़्लाई-ओवर
एक शहर है,
वहाँ छपते हैं अख़बार और पढ़े भी जाते हैं
अख़बार में छपी ख़बर नयी
शहर के बीच बना एक नया फ़्लाई ओवर
नामकरण को लेकर उदघाटन रूका हुआ था जिसका
खोल दिया गया है आज से जनता के लिये
शहर की जनता नये फ़्लाई-ओवर से खुश थी
बड़ा ही कनवीनिएंट होता है ना
रास्ते छोटे हो जाते हैं
तेज़ चलते हैं वाहन
वक्त कम लगा करता है आने-जाने में
इस पार से उस पार
लाल-हरी बत्ती का सिग्नल
और पुलिस वाले नहीं होते उस पर
साथ ही नहीं दिखायी देतीं
शहर की ज़मीन पर बसीं अवैध झुग्गी-बस्तियाँ
यानी स्व्च्छ खुला आसमान
फ़्लाई-ओवर के ऊपर से देखो
तो शहर दिखायी देता है विशाल और संदर
दूर तक दिखता है सब कुछ
सब कुछ उस धुएँ के साथ
जो फ़्लाई-ओवर के नीचे रहने वालोंके चूल्हों से निकलता है
कितना रोमांटिक होता है
सब कुछ फ़्लाई-ओवर के ऊपर से देखने पर
समय लेकर आता है
कितने दुःख
कितनी पीड़ाएँ अपने साथ
कितना अच्छा होता
बन सकता अगर एक फ़्लाई ओवर समय का
जो ले जाता तेज़ गति से
कम समय में
समय के इस पार से उस पार
-हितेन्द्र सिंह






हितेन्द्र जी, बहुत बढिया कविता लिखी है आपने। लेकिन मुझे तो बीते हुए वक़्त को याद करना उसे फ़्लाई-ओवर से देखने सरीखा ही लगता है। हाँ, कभी-कभी वर्तमान ज़रूर गड्ढेदार पगडण्डी पर से गुज़रने जैसा जान पड़ता है।
By: प्रतीक पाण्डे on October 14, 2006
at 7:52 pm